फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हादसों से लाल हो रहीं सड़कें-Lalitpur

विज्ञापन
विज्ञापन
हादसों से ‘लाल’ हो रहीं सड़कें
विज्ञापन

- ठोस पहल न होने से लगातार बढ़ते जा रहे हादसे
- रोज सड़क दुर्घटना में जा रही किसी व्यक्ति की जान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसाी। लगातार हो रहे सड़क हादसों से जिले की सड़कें ‘लाल’ हो रही हैं। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता कि सड़क हादसे में किसी की मौत न हो। सड़क दुर्घटनाओं में प्रति वर्ष सैकड़ों लोगों की जान जाने के बावजूद पुलिस, प्रशासन व संबंधित विभागों द्वारा इस पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही। कुछ कदम उठाए जाते हैं, लेकिन वह कारगर साबित नहीं होते, जिसका खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ता है।
चालकों की जरा सी लापरवाही ने कइयों की जिंदगी लील ली और परिजनों को जीवनभर का दर्द दे दिया। तेज गति, लापरवाही और शराब के नशे में वाहन चलाने के कारण तीन साल के दौरान सैंकड़ों लोग मौत का ग्रास बन चुके हैं। चालकों की जरा सी लापरवाही से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस साल जनवरी से सितंबर तक 159 लोग काल के गाल में समा चुके हैं। वहीं, तीन सौ से अधिक लोग घायल हो चुके। सड़क दुर्घटना में लगातार हो रही मौतों के लिए सरकारी व्यवस्था तो जिम्मेदार है ही, साथ ही वाहन चालक भी कम दोषी नहीं हैं।
विज्ञापन

लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करना शान समझते हैं। यही कारण है कि वह दुर्घटना का शिकार होते हैं और जान से हाथ धो देते हैं। इसके चलते ही जिले में दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। जिले में ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जिस दिन किसी मां की गोद सूनी न होती हो या किसी बच्चे के सिर से पिता का साया न छिनता हो, किसी पत्नी की मांग का सिंदूर न उजड़ता हो। विडंबना है कि इसके बाद भी लोग सबक लेने के लिए तैयार नहीं हैं। शनिवार को अंबावाय के पास ट्रक की टक्कर में बाइक सवार चार लोगों की मौत हो गई थी। यहां यातायात नियमाें का पालन न होने के एक साथ चार लोग मौत का शिकार हो गए। पहले भी जिले में इस तरह के हादसे हो चुके हैं, लेकिन कोई भी सबक लेने को तैयार नहीं है।
नियमों के पालन से हो सकता है बचाव
सड़क हादसों का एक बड़ा कारण चालकों द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करना भी है। इससे अधिक सड़क हादसे होते हैं। इसके चलते चालक स्वयं की जान तो खतरे में डालता ही है दूसरे व्यक्ति के लिए भी खतरा बनता है। यदि सभी के द्वारा नियमों का पालन किया जाए तो सड़क हादसों में कमी आने के साथ मरने वालों की संख्या भी कम हो सकती है।
बार-बार दुर्घटनाओं के ये भी कारण
बार-बार दुर्घटनाएं घटित होने के पीछे सड़क पर धीमी गति के ब्रेकर नहीं होने, मोड पर ब्रेकर नहीं होने, सड़क के दोनों तरफ आबादी होने, अचानक पशुओं का आगे आ जाना, सड़कों का खराब होना, चेतावनी बोर्ड नहीं लगाना घटना घटित होने का कारण माना गया है।
युवा ज्यादा हादसे का शिकार
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार हादसों का शिकार होने वालों में ज्यादातर युवा हैं। मृतक व घायल 18 से 40 वर्ष के बीच के हैं। ऐसे में युवाओं को विशेष तौर पर यातायात के बारे में समझाया जाएगा। ताकि हादसों पर अंकुश लगे।
विज्ञापन

तीन वर्षों के सड़क हादसे
-वर्ष - कुल हादसे - मृतक - घायल
2015 441 - 210 - 240
2016 280 - 110 - 187
2017 291 - 198 - 123
सड़क दुर्घटना के कारणों का होगा सर्वे
सड़क हादसों में हमेशा व प्रशासन व पुलिस को जिम्मेदार माना जाता है। जबकि हकीकत कुछ और होती है। एक बाइक पर चार लोग घर से निकलते हैं तो उनके माता-पिता और बहन-भाई क्यों नहीं टोकते हैं। हादसे में मृतक के परिवार के प्रति पुलिस की सहानुभूति होती है। इसीलिए बिना किसी गलती के जाने कार्रवाई होती है। लेकिन इन हादसों को लेकर आमजन को भी समझना होगा। सड़क पर जरा सी लापरवाही उनकी जान पर बन सकती है। सड़क हादसों के बारे में निरीक्षण व सर्वे कराया जा रहा है। एंबुलेंस 108 व अन्य लोगों से संपर्क कर हादसों के बारे में जानकारी एकत्रित की जाएगी। आखिर हादसे का सही कारण क्या था। जिसकी एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
विनोद कुमार सिंह, एसएसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें