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अटल बिहारी बाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा-City

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‘मैं नया इतिहास रचने चला...’
सब हेड --- भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की अस्थियां ओरछा तट पर विसर्जित
- मुक्ताकाशी मंच पर शहरवासियों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
- प्रमुख मार्गों से गुजरी अस्थि कलश विसर्जन यात्रा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ‘मैं नया इतिहास रचने चला...’ भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं से शनिवार को शहर गूंजता रहा। उनके अस्थि कलश को दर्शन के लिए मुक्ताकाशी मंच पर रखा गया, जहां महानगर के तमाम वयोवृद्ध, युवा और भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। तदुपरांत अस्थि कलश विसर्जन यात्रा शहर के अलग-अलग मार्गों से गुजरकर ओरछा के लिए रवाना हुई। लोगों ने गलियों से निकलकर और पुष्प वर्षा कर अस्थि कलश के अंतिम दर्शन किए।
शनिवार की सुबह 10.55 बजे पूर्व प्रधानमंत्री का अस्थि कलश अंतिम दर्शन के लिए मुक्ताकाशी मंच पर रखा गया। अटल जी के चित्र और कलश के समक्ष एक- एक कर सभी ने श्रद्धांजलि अर्पित की। ऐसे क्षण मेें वयोवृद्ध हों या युवा, चाहे भाजपा कार्यकर्ता हों, सभी भावुक थे। 11.15 बजे मुक्ताकाशी मंच से अस्थि कलश विसर्जन यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा में डीजे पर अटल जी की कविताएं गूंज रही थीं। एनसीसी और अन्य विद्यालयों के छात्र कदमताल करते चल रहे थे। अस्थि कलश पर जगह-जगह पुष्प वर्षा हुई। लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए गलियों से निकलकर सड़कों पर जमा रहे। रथ में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधायक रवि शर्मा और राजीव सिंह पारीछा सवार थे।
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पुलिस के सुरक्षा घेरे में चल रही अस्थि कलश यात्रा जीवनशाह, बीकेडी, आंतियाताल, खंडेराव गेट, पंचकुइयां, सिंधी तिराहा, रानीमहल, मिनर्वा, गोविंद चौराहा, इलाइट, जीवनशाह, कचहरी चौराहा, सदर बाजार, बस स्टैंड, रिसाला चुंगी होकर ओरछा पहुंची। दिन में ढाई बजे ओरछा में बेतवा नदी के कंचन घाट पर अस्थियों का विसर्जन किया गया।
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इस मौके पर प्रदेश के औद्योगिक मंत्री सतीश महाना ने कहा कि अटल जी का विशाल व्यक्तित्व था। देश में उन जैसा दूसरा व्यक्तित्व नहीं हो सका। उनकी किसी राजनेता से तुलना गलत है। वह सह्दय और कठोर निर्णय लेने वाले शासक थे। उन्होंने भाजपा का वह वट वृक्ष लगाया, जिसके नीचे सभी कार्यकर्ता राजनीति कर रहे हैं। वह कभी न विवादित बयान देते थे और न बात करते थे। वह जब प्रधानमंत्री बने तो एक इंटरव्यू में एंकर ने पूछा कि अब उनको सबसे ज्यादा किसकी कमी खलेगी? तो उनका कहना था कार्यकर्ताओं की। मैं जब युवा था तब अटल जी के लखनऊ आने पर सिर्फ साथियों के साथ उनको सुनने जाता था। उन्होंने इस तरह के कई संस्मरण सुनाए।
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