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जीएसटी की पड़ी मार, महंगा हुआ पशु आहार

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जीएसटी की मार, महंगा हुआ पशु आहार
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झांसी।
गुड्स एंड सर्विस टैक्स में पशु आहार भी महंगा हो गया है। बिनौला और खली पर पांच प्रतिशत टैक्स का प्रावधान किया गया है। पशु आहार बेचने वाले व्यापारियों ने आहार लेते समय पशु पालकों से आधार कार्ड नंबर मांगना शुरू कर दिया है, जिससे वह रिटर्न भरते समय बता सके कि उन्होंने माल किसको बेचा?
जब तिलहनों को पीस दिया या कुचल दिया जाता है तब उसमें से खाद्य तेल मात्र 30 प्रतिशत ही निकलता है। और 70 प्रतिशत बचे दूसरे उत्पाद खली को पशुओं के चारे में रूप में उपयोग में लाया जाता है। जीएसटी में खली को पांच प्रतिशत टैक्स की सूची में रखा गया है। हालांकि, तिलहन का उपयोग बीज के उद्देेश्य से इस्तेमाल किया जा रहा है। तो उसमें जीएसटी टैक्स के अंतर्गत छूट दी गई है। इसी तरह दूसरे तेल से बनने वाले पशु आहार बिनौला पर भी पांच प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। हालांकि, भूसे में मिलाने वाले चोखर (आटा छानने के बाद निकलने वाली सामग्री) को टैक्स मुक्त रखा गया है। पशु आहार टैक्स दायरे में आने के कारण कारोबारियों (स्टाकिस्ट) के सामने लिखा-पढ़ी का काम बढ़ गया है। कारोबारियों ने पशु पालकों से आधार कार्ड नंबर मांगना शुरू कर दिया है, जिससे वे रिटर्न में दिखा सके कि उन्होंने माल किसको बेचा?
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इस संबंध में वाणिज्य कर विभाग के नोडल अधिकारी अभिषेक गुप्ता ने बताया कि पशु आहार बेचने वाले कारोबारियों को अब स्टॉक का पूरा लेखा जोखा रखना होगा।
इन पर भी टैक्स
जीएसटी में मिल्क दूध या क्रीम, डब्बा बंद ब्रांडेड छेना और पनीर पर पांच प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। वहीं घी, मक्खन, और चीस पर 12 प्रतिशत तथा कंडेनसड मिल्क पर 18 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान किया गया है।
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अगली बार आधार नंबर लाने को कहा
मैंने छह गाय-भैंस पाल रखी हैं। पशु आहार आए दिन लेने जाना पड़ता है। इस बार स्टाकिस्ट ने साफ कह दिया कि अगली बार पशु आहार लेने आओ तो साथ आधार कार्ड की कापी जरूर लाना, नहीं तो सामान नहीं देंगे।
देेवेंद्र यादव, पशु पालक।
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