संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। ट्रेनों की स्पीड में अन्ना पशु भी बाधक बन रहे हैं। बीते चौदह माह में अकेले झांसी रेल मंडल में 2400 से अधिक मवेशी ट्रेनों से टकराकर कट चुके हैं। इससे हर माह औसतन 150 ट्रेनें प्रभावित हो रही हैं, इसका खामियाजा रेलवे के साथ यात्रियों को उठाना पड़ रहा है।
मिशन गतिशक्ति के तहत झांसी रेल मंडल में ट्रेनों की रफ्तार 130 किलोमीटर प्रतिघंटा से बढ़ाकर 160 की जानी है। इसके लिए रेल ट्रैक पर थिक वेब स्विच, ऑटोमेटिक सिग्नल, पुख्ता संचार माध्यम विकसित किए जा रहे हैं। लेकिन, ट्रेनों की रफ्तार में सबसे बड़ी बाधा बुंदेलखंड और झांसी-दिल्ली रेलमार्ग पर आसपास के गांवों से खुले छोड़ दिए गए मवेशी बन रहे हैं। बीते साल अप्रैल से लेकर जुलाई तक झांसी रेल मंडल में 2400 से अधिक मवेशी ट्रेनों के आगे आकर कट चुके हैं। इससे हर माह 150 ट्रेनें लेट हो जा रही हैं।
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भोजन के चक्कर में ट्रैक पर पहुंच रहे मवेशी : रेलवे ट्रैक पर मवेशियों के आने के सबसे बड़े कारणों में एक है ट्रेन में सवार यात्रियों द्वारा बचा हुआ भोजन ट्रैक पर फेंकना। इसे खाने के लिए मवेशी ट्रैक तक पहुंच रहे हैं।
- इन रेल खंड पर अधिक कटते हैं मवेशी : बीना-ललितपुर, बबीना-बिजौली, झांसी-दतिया, दतिया-सोनागिर, आंतरी-डबरा, ग्वालियर-बिरलानगर, मुरैना-धौलपुर, मुस्तरा-चिरगांव, मोंठ-एट, आटा-उरई, पुखरायां-कालपी रेलखंडों पर मवेशी कटने की घटनाएं अधिक हाे रही हैं।
रेलवे खड़ी करेगा दीवार : मवेशियों के ट्रेनों से टकराने की घटनाओं के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए रेल मंडल ने अब झांसी-धौलपुर, बीना-झांसी और झांसी-कानपुर रेलमार्ग पर हाईवे की तरह लोहे की फेंस लगाने की तैयारी कर ली है। झांसी-कानपुर रेलमार्ग पर इसको लेकर टेंडर जारी किए गए हैं।
2023-24 में कटे इतने मवेशी
अप्रैल 2023 में 151
मई में 189
जून में 197
जुलाई में 188
अगस्त में 207
सितंबर में 198
अक्तूबर में 181
नवंबर में 179
दिसंबर में 157
जनवरी 2024 में 139
फरवरी में 143
मार्च में 155
अप्रैल में 165
मई में 185
जून में 15
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फोटो ::
वर्जन
कई सेक्शन में ट्रेन से मवेशी टकराने की घटनाएं हो रही हैं। इससे ट्रेन की गति प्रभावित होती है। ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है कि वह अपने मवेशियों को ट्रैक के पास न आने दें। साथ ही यात्रियों से भी अपील है कि वह ट्रेन से भोजन ट्रैक पर न फेंकें।
दीपक कुमार सिन्हा, मंडल रेल प्रबंधक, झांसी।