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सात दिनों से अंधेरे में कट रही डेढ़ सौ परिवारों की रात

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झांसी। करगुवां जैन मंदिर के पीछे बसी नई बस्ती में डेढ़ सौ परिवार रहते हैं। ये परिवार पिछले दो साल से बिजली कनेक्शन मांग रहे हैं, लेकिन कनेक्शन नहीं मिल सका। मजबूरन, ये लोग जुगाड़ कर बिजली जलाकर काम चला रहे थे, लेकिन एक हफ्ते पहले वहां से निकले तारों को भी हटा दिया। अब ये परिवार बिना बिजली के एक- एक दिन काट रहे हैं। बिजली अधिकारी भी उनकी समस्या की अनदेखी कर रहे हैं।
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पिछले पांच साल से करगुवां जैन मंदिर के पीछे नई बस्ती विकसित हो रही है। यह कॉलोनी मेडिकल कॉलेज से एक किलोमीटर दूर है। वर्तमान में यहां करीब डेढ़ सौ परिवार रह रहे हैं। यहां के लोग बराबर बिजली कनेक्शन लेने के लिए कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। कई बार आवेदन दे चुके हैं। संबंधित क्षेत्र के अधिकारी व जेई हर बार जल्द कनेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर लौटा देते हैं। जल्द कनेक्शन मिलने की उम्मीद से यहां के लोगों ने जैन मंदिर परिसर से निकली एक लाइन
से जुगाड़ करके बिजली लगाते थे। पिछले रविवार को जैन मंदिर परिसर में लगा ट्रांसफार्मर खराब हो गया था। ट्रांसफार्मर तो बदल गया, लेकिन उक्त लोगों के तारों को लाइन से हटा दिया गया। इससे उनके घरों में अंधेरा हो गया। संबंधित क्षेत्र के जेई अब दोबारा उनके तार जोड़ने को तैयार नहीं है और न ही लोगों को स्थायी या अस्थायी कनेक्शन मिल पा रहा है। इससे लोगों के लिए पिछले हफ्ते से बिजली के बिना पल- पल काटना मुश्किल हो रहा है। शनिवार को लोगों के एकत्रित होने पर उपखंड अधिकारी नवीन जिंदल ने मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद जल्द समस्या का हल निकालने का आश्वासन देकर वे लौट आए।
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- करगुवां जैन मंदिर के पीछे बस्ती के लोगों को कनेक्शन मिल सके। इसके लिए योजना पर काम चल रहा है। जल्द ही समस्या का निराकरण हो जाएगा। नवीन जिंदल, उपखंड अधिकारी, मेडिकल।
बस्ती के पास ही बिजली की लाइन निकली है, इसके बाद भी कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है। बिजली विभाग उनसे बेहद बुरा बर्ताव कर रहा है। भगवत नारायण।
मैं कनेक्शन के लिए कई बार आवेदन दे चुकी हूं, लेकिन विभाग में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गर्मी में बिना बिजली पल- पल काटना मुश्किल हो रहा है। गीता श्रीवास्तव।
हम सभी बस्ती के लोग बेबस हो गए हैं। न अधिकारी और न ही जेई फोन उठा रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि हम अपनी समस्या को लेकर किसके पास जाएं? अशोक तिवारी।
बिजली के बिना बच्चे बीमार हो रहे हैं। पानी लाने के लिए दूर हैंडपंप पर जाना पड़ रहा है। उपखंड अधिकारी ने शाम तक समस्या का निराकरण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब फोन बंद आ रहा है। उमेश।
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