झांसी शहर के तीन प्रमुख पार्कों के दिन में बंद होने के फरमान से आसपास बैठकर रोजगार करने वालों की रोजीरोटी छिन गई है। दिन भर में किसी तरह दो जून की रोटी कमाने वालों को अब समझ में नहीं आ रहा है कि कहां जाएं और क्या करें।
महारानी लक्ष्मीबाई पार्क, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पार्क और सीपरी बाजार के मान्यवर कांशीराम पार्क के खुलने और बंद होने का समय बदल जाने से नगर निगम भले ही अपनी पीठ थपथपा रहा हो, पर पार्कों के आसपास रोजी रोटी काने वालों के पेट पर लात पड़ी है। अब उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें और कैसे अपना रोजगार चलाएं, क्योंकि पार्कों में दिन में ताला जड़ा होने के कारण अब कोई आता-जाता नहीं है। इससे पापड़, नमकीन, पानीपूरी समेत खाने पीने के अन्य आइटम बेचने वाले परेशान हैं। अब केवल सुबह और शाम को ही बिक्री रह गई है। वह भी नपे तुले घंटे तक।
पहले ये पार्क सुबह 4.30 बजे से रात 8.30 बजे तक खुले रहते थे, यहां दिन भर लोगों को आना - जाना रहता था। लेकिन, अब इन्हें सुबह 11 से शाम पांच बजे तक बंद रखा जा रहा है। इस कारण पूरा दिन पार्क बंद रह रहे हैं। दिन भर पार्कों में सन्नाटा रहने से रोज कमाने खाने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
मान्यवर कांशीराम पार्क के समाने बैठकर पापड़ बेचकर गुजारा होता है। कोई दूसरा कमाने का जरिया नहीं है। एक सप्ताह से पार्क बंद हो जाने से दिन भर कोई ग्राहक नहीं आता।
फूलवती, मसीहागंज
पार्क बंद होने से परेशान हैं। टॉफी, नमकीन बेचकर गुजारा हो जाता था। लेकिन, अब आमदनी का जरिया ही ठप हो गया। लोगों को पता चल गया है कि दिन में पार्क बंद रहने लगे हैं। इस कारण परेशानी बढ़ गई है।
- अंकित सेन
दिन में पार्क बंद होने से परेशानी झेलनी पड़ रही है। नमकीन, बीड़ी, टॉफी, गुटका समेत बच्चों के खाने पीने की चीजों की बिक्री पर असर पड़ा है।
दिनेश, मसीहागंज
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इन्हें हुई परेशानी
परिचित से मिलने मसीहागंज गए थे। मिलने वाले ने उन्हें फोन करके बताया कि आने में एक घंटा लग सकता है। इस पर वह मान्यवर कांशीराम पार्क चले गए, लेकिन पार्क में ताला बंद था। वह गेट के बाहर इंतजार कर रहे हैं।
अशोक सोनी
शिवाजी नगर
भागदौड़ भरे जीवन में दिन में थोड़ी देर पार्क की खुली हवा में बैठने से मन को सुकून मिल जाता था। लेकिन, नगर निगम ने यह सुकून भी छीन लिया है। अब आदमी कहां जाए।
केशव
लहरगिर्द
पार्क बंद होने से सबसे अधिक असर बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ा है। जो लोग सर्दी की वजह से सुबह पार्क नहीं आ सकते हैं, वह दिन में पार्क में बैठते थे। लेकिन, नगर निगम ने उनका ध्यान नहीं रखा। अराजकतत्वों का आना बंद करना था तो सुरक्षा गार्ड बदले जा सकते थे। इस तरह से पार्क को बंद कर देना समस्या का समाधान नहीं है।
- महेश गौतम, पार्षद मसीहागंज
नगर आयुक्त से बात करेंगे कि पार्कों को बंद न किया जाए। यह बात सही है कि दिन में अराजकतत्व पार्क में घूमते थे, लेकिन पार्क बंद करना समाधान नहीं है। बेहतर होता कि अराजकतत्वों पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा कर्मियों का सहारा लिया जाता।
- कन्हैया कपूर, पार्षद प्रेमगंज
पार्क बंद हो जाने से आम नागरिक, पर्यटक और बाहरी लोग जो घूमने आते हैं, उन्हें असुविधा हो रही है। आम जनमानस में नाराजी है। इसलिए महापौर से कहा है कि पार्कों को दिन में भी खोला जाए।
- प्रदीप खटीक, पार्षद बाहर सैंयरगेट