बांधों को बारिश के एक झड़ी का इंतजार
झांसी। ललितपुर और भोपाल के आसपास क्षेत्र में एक बार और तेज बारिश होने से राजघाट बांध भर जाएगा। इसके बाद यहां से छूटने वाले पानी से माताटीला औैर नीचे के अन्य बांधों को भरना आसान हो जाएगा। राजघाट बांध वैसे तो डेढ़ मीटर खाली है, मगर आधा मीटर बढ़ने पर ही पानी छोड़ने की स्थिति बन सकती है। जिले में अभी तक 323 मिलीमीटर और ललितपुर में 280 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
महानगर में पीने के पानी की समस्या न रहे, इसके लिए माताटीला बांध का भरना जरूरी है। माताटीला बांध राजघाट बांध पर निर्भर है। राजघाट बांध भरने पर यहां से छोड़े जाने वाले पानी से ही माताटीला, सुकुवां ढुकुवां, पारीछा और अन्य बांध भरते हैं। माताटीला बांध से पहूज बांध और दतिया के अंगूरी बैराज बांध को भी पानी दिया जाता है। 28 जून से अब तक मध्य प्रदेश व ललितपुर जिले में हुई बरसात से राजघाट और माताटीला बांध भरने के कगार पर पहुंच गए हैं। मगर, पिछले पंद्रह दिन से बारिश न होने से इन बांधों से पानी छोड़ने की स्थिति नहीं बन पा रही है। राजघाट बांध का जलस्तर 356.25 मीटर से बढ़कर 369.25 मीटर पर पहुंच गया है। इस हिसाब से बांध में 39 फीट पानी बढ़ा है।
राजघाट बांध का कुल जलस्तर 371.90 फीट है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस बांध में आधा मीटर से ऊपर और पानी बढ़ा तो उसको गेट खोलकर बेतवा नहर में छोड़ने की स्थिति बन जाएगी। इसी तरह, माताटीला बांध का जलस्तर 986.6 फीट से बढ़कर 1000.22 (304.22 मीटर) फीट पर पहुंच गया है। बांध का कुल जलस्तर 1,012 (308.46 मीटर) फीट है। मालूम हो कि पिछली बार झांसी में कम पानी बरसा था, लेकिन भोपाल में अच्छी बरसात हो जाने के कारण बांध भर गए थे। इसीलिए अब इंतजार किया जाने लगा है कि मध्य प्रदेश के भोपाल और आसपास क्षेत्र में ऐसी ही बरसात होती रहे तो बांधों में पानी आ जाएगा।
मायूस होकर लौट रहे पर्यटक
बारिश होते ही माताटीला, सुकुवां ढुकुवां और पारीछा बांध का माहौल खुशनुमा हो जाता है। बांधों से छूटने वाले पानी का दृश्य देखने के लिए हजारों की संख्या में पर्यटक उक्त तीनों बांधों पर पहुंचना शुरू हो जाते हैं। ऐसे माहौल में परिवार के साथ पिकनिक मनाने का आनंद ही अलग होता है। मगर, अगस्त का एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी इस बार बांध नहीं भर सके हैं। दूसरा, बांधों पर उमस भी है। इससे पर्यटकों का बांधों पर मौजमस्ती करने का इरादा पूरा नहीं हो पा रहा है। जो जा भी रहे है तो उनको मायूस होकर लौटना पड़ता है।