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अदर्स- नक्षत्र वाटिका-City

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नक्षत्र व नवग्रह वाटिका में करें शुभ पौधों के ‘दर्शन’
- भगवतंपुरा में बनी नक्षत्र वाटिका में लगे 27 पौधे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
वन विभाग ने अबकी बार जिले में शुभ पौधों की तीन नवग्रह वाटिकाएं और एक नक्षत्र वाटिका तैयार की है। मान्यता है कि वाटिकाओं में लगे पौधे आम इंसान के जीवन पर असर डालते हैं। नक्षत्रीय पौधे आयुर्वेदिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शास्त्रों में लिखा है कि अपने जन्म नक्षत्र के पौधे को हानि पहुंचाने से बरबादी होती है। इसलिए वाटिकाओं में जन्म नक्षत्र के पौधों के दर्शन कर पुण्य लाभ कमा सकते हैं।
वन विभाग ने अबकी बार जिले में पांच नवग्रह वाटिकाएं लगाई हैं। वन रेंज बामौर, भगवंतपुरा, गुरसराय, मऊरानीपुर और बबीना में बनाई गई इन वाटिकाओं में पौधे रोपे गए हैं। नवग्रह वाटिकाओं में सौर मंडल के सभी नौ ग्रहों के हिसाब से पौधे रोपे गए हैं। इसमें शमी, पीपल, गूलर, कुश, मदार, खैर, दूब, लटजीरा और पलाश के पौधे शामिल हैं। यह सभी पौधे नवग्रह चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, रवि, राहु और केतु के महत्व के हिसाब से लगाए गए हैं। इसी तरह भगवतंपुरा में नक्षत्र वाटिका तैयार की गई है। दो हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल में बनाई गई इस वाटिका में 27 नक्षत्रों के हिसाब से पौधे रोपे गए हैं।
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इस तरह रोपे गए
सभी पौधे एक वृत्त में वृत्त की परिधि को 27 बराबर भागों में बांट कर रोपे गए हैं।

जानिए नक्षत्र के अनुसार पौधे
अश्विनी नक्षत्र का कुचिला, भरणी का आंवला, कृतिका का गूलर, रोहिणी का जामुन, मृगशिरा का खैर, आर्दा का शीशम, पुनर्वस का बांस, अश्लेषा का नागकेसर, मघा का बरगद, पूर्वा फाल्गुनी का ढाक, उत्तरा फाल्गुनी का पाकड़, हस्त का रीठा, चित्रा का बेर, स्वाती का अर्जुन, विशाखा का कंटारी, अनुराधा का मौलश्री, ज्येष्ठा का चीड़, मूल का साल, पूर्वाषाढ़ा का जलढेतरा, उत्तरासाढ़ा का कटहल, श्रवण का मदार, घनिष्ठा का छ्योंकर, शतभिगा का कदंब, पूर्वाभाद्रपद का आम, उत्तराभाद्रपद का नीम और रेवती नक्षत्र का पौधा महुआ है।

क्या है नक्षत्र?
जिस तरह पृथ्वी के धरातल को भूगोल के जानकार 36 अंश की अक्षांश रेखाओं में चिह्नित करते हैं, उसी तरह प्राचीन काल में भारत के ऊपर आकाश को 27 बराबर भागों में बांटा गया है। इसके हरेक भाग को नक्षत्र कहते हैं। इन नक्षत्रों की पहचान आसमान में तारों की स्थिति विन्यास से की जाती है। जिस तरह समुद्र में चलते जहाज की स्थिति देशांतर रेखा में व्यक्त की जाती है, उसी तरह पृथ्वी के नजदीक ग्रहों के भ्रमण की स्थिति नक्षत्रों में व्यक्त की जाती है।

साल का पौधा बार-बार मर रहा
हिमालय की तराई में पाया जाने वाला पौधा साल यहां के वातावरण की गर्मी को सहन नहीं कर पा रहा है, जिससे चार बार रोपने के बाद भी पौधा मर गया है। अब फिर से कोशिश की जा रही है।

वनगुवां में स्मृति वन
बरुआसागर के नजदीक वनगुवां पौधशाला में स्मृति वन तैयार किया गया है। यदि कोई व्यक्ति अपने परिजन अथवा अन्य किसी की याद में कोई पौधा रोपना चाहता है तो स्मृति वन में पौधे को रोप सकता है। पौधे की देखरेख के लिए विभागीय कर्मचारी रहते हैं, जो पौधों को समय-समय पर पानी देते हैं।
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वाटिकाएं तैयार
नक्षत्र वाटिका और नवग्रह वाटिकाएं तैयार हैं। इस बार पानी बहुत कम बरसा है, इसलिए पौधों की प्रगति बेहतर नहीं है। लेकिन, पौधों को पर्याप्त पानी दिया जा रहा है, ताकि पौधे जीवित रहें।
डा. मनोज कुमार शुक्ला, प्रभागीय वनाधिकारी
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