सज गई चौसर, फेंके जाने लगे पांसे
झांसी। सियासी चौसर पर शह और मात के लिए पासे फेंके जाने लगे हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस बार नया दांव खेला है। कई पुराने नेताओं को टिकट न देकर नए चेहरों पर दांव लगाया है। वहीं कुछ पुराने नेताओं पर भी विश्वास जताया है। बुंदेलखंड के चुनावी संग्र्राम में तीन वर्तमान व दो पूर्व सांसद, एक पूर्व विधायक व पूर्व एमएलसी अपनी प्रतिष्ठा के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। वहीं, नए प्रत्याशी भी कहीं से पीछे नहीं हैं। वे चुनावी गणित को नया सूत्र दे रहे हैं। भितरघात का फायदा उठाने की पूरी जुगत यह प्रत्याशी लगा रहे हैँ।
बुंदेलखंड में झांसी- ललितपुर, जालौन- गरौठा-भोगनीपुर, हमीरपुर- तिंदवारी और बांदा चित्रकूट संसदीय क्षेत्र आते हैं। अभी चारों सीटेें भाजपा के खाते में हैं। भाजपा, सपा- बसपा गठबंधन व कांग्रेस यहां हर सीट को अपने झोली में डालना चाहती है। इस बार तीन वर्तमान सांसदों व दो पूर्व सांसदों की प्रतिष्ठा दांव पर है। बाकी नए चेहरे हैं, जिनको पार्टियां पहली बार आजमा रही हैं।
झांसी ललितपुर संसदीय क्षेत्र से वर्तमान सांसद उमा भारती के चुनाव लड़ने से पीछे हटने के बाद भाजपा ने उद्योगपति अनुराग शर्मा को मैदान में उतारा है। वह पहली बार सियासी जंग में उतरे हैं। मोदी लहर के सहारे वह मतदाताओं के बीच आगे बढ़ रहे हैं। उनका मुकाबला करने के लिए सपा- बसपा गठबंधन ने पूर्व एमएलसी श्याम सुंदर सिंह को आगे बढ़ाया है। उनका भी लोकसभा में यह पहला चुनाव है। पूर्व में वह भाजपा के टिकट पर बबीना विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन इस चुनाव में उनको तीसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी शिवशरण कुशवाहा इस चुनाव में पहली बार अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। वह बसपा के पूर्व मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा के भाई हैं।
इधर, जालौन सीट सुरक्षित है। परसीमन के बाद इसमें भोगनीपुर क्षेत्र और जुड़ गया है। यहां से भाजपा ने फिर सांसद भानु प्रताप वर्मा पर दांव खेला है। वह इसके पहले भी यहां चार बार सांसद रह चुके हैं। इस बार चुनाव में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। उनसे सीट छीनने के लिए बसपा- सपा गठबंधन ने युवा चेहरा अजय सिंह पंकज को आजमाया है। वह पहली बार चुनावी मैदान में हैं। जबकि, कांग्रेस से पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी तीसरी बार किस्मत अजमा रहे हैं। बृजलाल 1999 में बसपा के टिकट पर सांसद बने थे और 2009 में राज्यसभा के लिए मनोनीत हुए। इसके बाद उन्होंने बसपा छोड़कर कांग्र्रेस का दामन थाम लिया। इस चुनाव में तीनों प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर है।
हमीरपुर- तिंदवारी सीट पर भी मुकाबला रोचक बना हुआ है। यहां भाजपा से सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल दोबारा चुनावी मैदान में हैं। बसपा- सपा गठबंधन ने दिलीप कुमार सिंह और कांग्रेस ने प्रीतम सिंह लोधी पर दांव खेला है। यहां के मतदाताओं का हर बार मूड बदलता रहा। इस लिहाज से तीनों प्रमुख प्रत्याशी अपने पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रहे हैं।
इधर, बांदा- चित्रकूट संसदीय क्षेत्र में भाजपा से वर्तमान सांसद भैरों प्रसाद मिश्र का टिकट कटने के बाद इस सीट पर घमासान बढ़ गया है। यहां पर सभी प्रमुख पार्टियों ने नए चेहरे मैदान में उतारे हैं। भाजपा ने भैरों प्रसाद मिश्र का टिकट कटने के बाद मिर्जापुर से एक बार सांसद रहे आरके पटेल पर दांव खेला है। आरके पटेल बसपा से विधायक और मंत्री भी रह चुके हैं। टिकट बदलने का निर्णय पार्टी के लिए भारी न पड़ जाए, इसलिए पूरी ताकत यहां झोंकी जा रही है। भैरों प्रसाद मिश्र भी अपनी पार्टी के प्रत्याशी का विरोध कर रहे हैं। वहीं, सपा- बसपा गंठबंधन ने ईंट का जवाब पत्थर से देते हुए भाजपा छोड़कर आए इलाहाबाद से वर्तमान सांसद श्यामा शरण गुप्त को मैदान में उतारा है। वह इसके पहले बांदा सीट से ही सपा के टिकट पर सांसद रह चुके हैं। कांग्रेस ने ददुआ के परिवार से जुड़े पूर्व विधायक बाल कुमार पटेल को दांव खेला है। इस सीट पर तीनों ही प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।