दूध से हल्दी तक मिलावट, क्या खाएं-क्या पिएं
झांसी।
जिले में मिलावट का धंधा जोरों पर है। दूध से लेकर हल्दी, मिर्च व अन्य रसोई मसालों में मिलावट हो रही है। लिहाजा बाजार के ही नहीं घर में बन रहे खाद्य पदार्थ भी सुरक्षित नहीं हैं। लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा लिए गए सैंपल की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। लाल मिर्च, हरा धनिया, कुल्फी, सरसों के तेल व दाल में मिलावट करने वालों पर नकेल कसने के लिए जुर्माना लगाया जा रहा है। कुल्फी में दूध के नाम पर पाउडर मिलाकर बेचने पर दुकानदार को छह महीने की सजा सुनाई गई है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है। पिछले दिनों विभाग ने चिरगांव में कुल्फी बेचने वाले के यहां से दूध के सैंपल लिए थे। विधि विज्ञान प्रयोगशाला में इसकी जांच की गई तो दूध अमानक पाया गया। दूध में फैट की मात्रा कम और गाढ़ा करने के लिए सफेद रंग के पाउडर की मिलावट पायी गई थी। सैंपल फेल होने पर विभाग ने आरोपी दिलीप कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में हुई और दोष सिद्ध होने पर छह माह की सजा सुनाई गई।
अकेले कुल्फी के इस मामले में ही नहीं, बल्कि एक अप्रैल से लेकर दिसंबर तक विभाग द्वारा लिए गए सैंपल में से 219 की जांच रिपोर्ट आई। इसमें से 123 सैंपल फेल हो गए। ज्यादातर दूध, सरसों का तेल, लाल मिर्च, हरा धनिया, हल्दी और दाल में खेसारी की मिलावट के थे। 18 नमूने असुरक्षित पाए गए। किसी में आर्जीमोन मिला था तो मिर्च में लाल रंग मिलाकर सुर्ख किया गया था। हल्दी में भी पीले रंग की मिलावट की गई थी। चार सैंपल तो ऐसे थे कि उनके लेबल निकालकर दूसरी कंपनी के लेबल चिपका दिए गए थे। इसमें खुला मसाला पैक किया गया था, जब वास्तविक कंपनी से उसका मिलान किया गया तो दोनों में बहुत अंतर पाया गया।
इस तरह 122 लोगों के खिलाफ मुकदमे दायर किए गए और मुख्यालय में बैठने वाले आयुक्त से अनुमति ली गई, इसके बाद मुकदमे दर्ज कराए गए। मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाई गई और पिछले साल तथा इस साल के 141 मुकदमों में न्याय निर्णायक अधिकारी ने फैसले सुनाए और मिलावटखोरों पर 47.64 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया।
बिना लाइसेंस की चल रहीं थी दुकानें
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बिना लाइसेंस के दुकान चलाने वालों की जांच की। जांच में 29 दुकानदार ऐसे पाए गए, जो बिना लाइसेंस के दुकान चला रहे थे। इन सबकेे खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया है।
दुकानदारों को कार्रवाई से बचना है तो खाद्य पदार्थ बेचने वाले सभी दुकानदार नियमानुसार लाइसेंस बनवाकर कारोबार करें व मिलावटी सामग्री न बेचें, क्योंकि मिलावटी सामग्री से कई तरह की बीमारियां होती हैं। अभियान लगातार चलाया जा रहा है। कोई भी मिलावटखोर बख्शा नहीं जाएगा।
- राजेश द्विवेदी
अभिहित अधिकारी
मिलावटी खाद्य सामग्री को खाने से गुर्दे में संक्रमण का खतरा रहता है, जो आगे चलकर जानलेवा साबित होता है। इसलिए बीमारियों से बचना है तो मिलावटी खाद्य सामग्री से दूर रहना चाहिए।
- डॉ. आलोक रावत
चिकित्सक