झांसी। सीपरी बाजार ओवरब्रिज के लिए फरवरी से गार्डर मिलने लगेेंगे, जिससे काम में तेजी आ जाएगी। पता चला है कि अगले हफ्ते स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) उत्तराखंड के काशीपुर की कंपनी को लोहा उपलब्ध करा देगा। इससे गार्डर मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
रेलवे ने सीपरी ओवरब्रिज में लगने वाले गार्डर बनाने का ऑर्डर दो साल पहले ही उत्तराखंड के काशीपुर की कंपनी को दिया था, लेकिन सेल कंपनी द्वारा वक्त पर लोहा उपलब्ध नहीं कराने के कारण काम खिंचता जा रहा है।
पहले मार्च 2019 तक काम पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन गार्डर मिलने में हो रही देरी के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। अभी दस गार्डरों की और आवश्यकता है। रेलवे के निर्माण विभाग के एक अफसर की मानें तो अगले हफ्ते में सेल गार्डर बनाने के लिए पूरा लोहा उपलब्ध करा सकता है। इसके बाद गार्डर बनने में वक्त नहीं लगेगा। इस हिसाब से ब्रिज बनने में अभी पांच से छह महीने और लग जाएंगे।
मालूम हो कि अभी तक सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण में रेलवे अपने हिस्से के चारों पिलर बनाने और उनके ऊपर बीम डालने का काम पूरा कर चुका है। चित्रा चौराहे की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखे जा चुके हैं। इसमें एक गार्डर का वजन 75 टन है जो उत्तराखंड में बनकर आए हैं। अब पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। इन बचे 12 गार्डर में दो आ भी चुके हैं।
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जून 2014 में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने निर्माण कार्य शुरू किया। दिसंबर 2016 तक काम पूरा होना था मगर सितंबर 2016 तक सेतु निगम ही अपना काम पूरा कर सका। इससे समय गुजरने के साथ-साथ ब्रिज निर्माण की लागत भी बढ़ती गई। अकेले रेलवे ने ही अपनी लागत में 37 करोड़ रुपये की वृद्धि कर दी। इसके बाद सितंबर 2016 में रेलवे ने अपने हिस्से के 122 मीटर का काम शुरू किया। रेलवे ने ओवरब्रिज निर्माण में 18 माह का लक्ष्य बनाया था।