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मदरसा शिक्षक--Lalitpur

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कैसे जलें मदरसा शिक्षकों के घरों के चूल्हे!
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झांसी। केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित मदरसा आधुनिकीकरण योजना के शिक्षकों को 28 माह से वेतन नहीं मिला है। इससे उन्हें व परिजनों को आर्थिक तंगी का दंश झेलना पड़ रहा है।
राज्य और केंद्र सरकार द्वारा मदरसा शिक्षकों को पढ़ाने के एवज में मानदेय दिया जाता है। जिसमें दो से तीन हजार रुपये राज्य सरकार और छह से बारह हजार रुपये केंद्र सरकार के द्वारा दिए जाते हैं। धनराशि सीधे मदरसा शिक्षकों के खाते में आती है। मदरसा आधुनिकीकरण योजन के तहत जिले में 343 मदरसे हैं। इनमें 1029 शिक्षक हैं।
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इस योजना में एक मदरसे में तीन शिक्षकों को मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के बनते ही सभी मदरसों पर जांच पड़ताल का शिकंजा कसा गया और सभी तरह की आर्थिक मदद रोक दी गई थी। जांच में जिले के 47 मदरसों को अनियमित पाए जाने पर बंद करा दिया गया था। लगभग तीन साल से इन शिक्षकों को केंद्राश नहीं मिला है। इसके चलते योजना अंतर्गत मानदेय पाने वाले शिक्षकों की जिंदगी की रफ्तार प्रभावित हो गई है। इसका असर रसोई तक आने लगा है।

परेशानी का सामना करना पड़ रहा
केंद्रांश नहीं मिलने से बच्चों को पढ़ाने में दिक्कत आ रही है। रोजमर्रा के खर्चों को तरस रहे हैं। शिक्षक ों को 28 माह से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कदीम, मदरसा शिक्षक

सुनवाई नहीं होती
मदरसा शिक्षक हूं, छोटे बच्चों को शिक्षा दे रही हूं। पहले ऐसा नहीं होता था, अब वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों को आजीविका चलाना मुश्किल हो गया है। कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं कोई सुनवाई नही होती।
साधना राय, मदरसा शिक्षक

मजदूरी कर घर का खर्च चला रहे
मदरसा शिक्षक हमेशा से ही सरकार की अनदेखी का शिकार रहे हैं। किराए के मकान में रहते हैं, मानदेय नहीं मिलने के कारण किराया तक अदा नहीं कर पा रहा रहे हैं। मदरसे में पढ़ाने के बाद टयूशन पढ़ा कर घर का खर्च चला रहे हैं।
शिवा कांत, मदरसा शिक्षक

रोजमर्रा के खर्चों को तरस रहे
मदरसा शिक्षकों को अरसे से मानदेय नहीं मिला है। इस बीच अधिकारियों ने कई बार निरीक्षण किया। जांच पड़ताल की गई। लेकिन मानदेय अभी तक नहीं मिला। इससे मदरसा शिक्षक रोजमर्रा के खर्चों को तरस रहे हैं।
अलीम अहमद, मदरसा शिक्षक

कर्जदार हो गए
पढ़ाने के अलावा और कोई काम नही करते हैं, एसी मंहगाई में घर चलाना मुश्किल हो गया है। ग्रहस्थी चलाने के लिए दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसा उधार ले रखा है। वेतन नहीं आने से मुंह छुपा कर निकलना पड़ रहा है। रमजान खान, मदरसा शिक्षक
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सन् 2015 से मदरसे में पढ़ा रही हूं। मदरसे में पढ़ाने प्रतिदिन जाना पढ़ता है जिससे रोजाना तीस रुपये खर्च करना पड़ता है। बच्चे बड़े हैं घर का खर्च अधिक है। मानदेय नहीं आने से आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संगीता शर्मा, मदरसा शिक्षक
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