संचालन से जुड़ेगी इंजीनियरिंग की ‘गैंग’
रेल हादसों से सबक लेकर इस पर काम हुआ शुरू
दो विभागों में बंटे होने से पटरियों पर काम करने में ट्रैकमैन और कीमैन को आती है परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
रेलवे जल्द ही ट्रैकमैन और कीमैन को इंजीनियरिंग से हटाकर संचालन विभाग से जोड़ देगा। पिछले दिनों हुए मुजफ्फर नगर हादसे में परिचालन और इंजीनियरिंग विभाग में समन्वय की कमी सामने आई थी। इससे सीख लेकर रेलवे ने यह फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड जल्द ही इस पर गाइड लाइन जारी करेगा।
अभी रेलवे के परिचालन विभाग (संचालन) से स्टेशन मास्टर, कंट्रोलर, ट्रेन लिपिक, प्वाइंट्समैन, कांटे वाला, गार्ड जुड़े हुए हैं। जबकि इंजीनियरिंग विभाग से रेल पथ निरीक्षक, ट्रैकमैन, कीमैन, ट्रॉली मैन, गेटमैन आते हैं। यह सभी कर्मचारी ट्रेन ऑपरेशन (गाड़ी संचालन) से जुड़े हैं। दरअसल, रेल पटरियों (ट्रैक) के रखरखाव का काम रेल पथ निरीक्षक के नेतृत्व में होता हैं। ट्रैकमैन, कीमैन और गेटमैन रेल पथ निरीक्षक के अधीन काम करते हैं। पटरियों पर काम कराने के लिए परिचालन विभाग से ब्लाक लेना पड़ता है। मगर, परिचालन विभाग कहता है कि वे गाड़ियां लेट नहीं कर सकते। जैसे कि, किसी पटरी पर वेल्डिंग करनी है तो कम से कम डेढ़ घंटे का ब्लाक चाहिए। ऐसी स्थिति में पीडब्लूआई को तमाम आग्रह के बाद ही ब्लाक मिल पाता है। इस कारण अक्सर पीडब्लूआई छोटे-मोटे काम कराने के लिए ब्लाक नहीं लेते हैं। वे अपने हिसाब से पता कर लेते है कि ट्रेन गुजरने में कितना वक्त है? उस समय का अंतर निकालकर काम शुरू कर देते हैं। करते हैं, ताकि कोई हादसा नहीं हो सके। मगर, कई बार यह अनुमान उनका गलत साबित हो जाता है। मुजफ्फरनगर हादसा इसी जल्दबाजी का नतीजा था।
रेल मंत्री और बोर्ड अध्यक्ष की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई महाप्रबंधकों की बैठक में इन बिंदुओं पर चर्चा की गई, जिसमें सामने आया कि परिचालन और इंजीनियरिंग विभाग के बीच सामंजस्य की कमी सामने आईं। इस पर निर्णय लिया कि पटरियों के रखरखाव में लगे ट्रैकमैन और कीमैन कर्मचारियों को परिचालन विभाग के अधीन कर दिया जाए। इससे परिचालन विभाग अपने हिसाब से ब्लाक देकर कर्मचारियों से काम करा सके।
‘रेलवे बोर्ड स्तर पर अभी इस विषय पर चर्चा हुई है। गाइड लाइन आने पर ही तस्वीर साफ हो सकेगी।’
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ।
ये देना पड़ता है ध्यान
- कहीं पटरी चटकी तो नहीं
- स्लीपर तो खराब नहीं हो गए
- चाबियां ढीली तो नहीं
- ज्वाइंट पर वेल्डिंग की जरूरत तो नहीं
- क्रासिंग प्वाइंट ठीक से काम कर रहे कि नहीं
- पटरी बदलने की जरूरत तो नहीं