झांसी। सोमवार को जिला महिला अस्पताल में मानवता की धज्जियां उड़ गईं। 13 घंटे से प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को अस्पताल प्रशासन टरकाता रहा। परिजनों के हंगामा करने के बाद सीएमओ ने हस्तक्षेप कर मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया। जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
सैंयर गेट निवासी राजा की पत्नी शबाना (24 वर्ष) को रविवार रात प्रसव पीड़ा होने लगी। आनन-फानन में परिजन रात एक बजे शबाना को जिला महिला अस्पताल लाए। ड्यूटी पर रही महिला चिकित्सक ने उसे सुबह लाने को कहकर टहला दिया। थके-हारे परिजन भी उल्टे पांव सुबह इलाज की उम्मीद लेकर घर चले गए।
सोमवार की सुबह करीब नौ बजे प्रसूता को परिजन महिला अस्पताल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक प्रसूता की तबियत काफी बिगड़ चुकी थी। सुबह ओपीडी में तैनात मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वसुधा अग्रवाल मरीज को बिना भर्ती किए ही तीमारदार को एक यूनिट खून की व्यवस्था करने को कहा। तीमारदार मरीज को भर्ती करने का आग्रह करने लगे तो चिकित्सक ने जटिल प्रसव का बहाना बनाकर उसे मेडिकल कालेज ले जाने को कहा। कई घंटे से परेशान तीमारदारों ने मरीज को भर्ती न करने पर हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जटिल प्रसव था तो उन्हें रात से सुरक्षित प्रसव का क्यों आश्वासन दिया? हंगामे की सूचना मिलते ही पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य भी पहुंच गए। लेकिन, अस्पताल कर्मी उनकी भी सुनने को तैयार नहीं हुए। प्रदीप जैन ने सीएमओ डॉ. विनोद यादव को बुलाया। मौके पर पहुंचे सीएमओ के निर्देश पर मरीज को भर्ती किया गया। बाद से प्रसूता ने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। हंगामा समाप्त होने के बाद मरीज की हालत जानने के लिए पूर्व गरौठा विधायक बृजेंद्र व्यास भी पहुंच गए थे।
जब सीएमएस ने छोड़ा मैदान
झांसी। मरीज को भर्ती नहीं करने की जिद पर अड़ी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वसुधा अग्रवाल के साथ सीएमओ व प्रदीप जैन आदित्य बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान पत्रकारों द्वारा सवाल पूछने पर सीएमएस भड़क उठीं और वह अस्पताल छोड़ कर जाने लगीं। मरीज की हालत देख तीमारदारों ने सीएमएस को घेर लिया। सीएमओ व प्रदीप जैन द्वारा काफी समझाने के बाद मानीं और मरीज को भर्ती किया।