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ख्वाजा का दरबार मदीना लगता है...

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ख्वाजा का दरबार मदीना लगता है...
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ललितपुर। हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्ला अलैह के सालाना उर्स के अंतिम दिन मुंबई के फनकार जुनैद सुल्तानी व बंगलूरू के सईद-फरीद ने महफिल-ए-कव्वाली में समां बांध दिया। उन्होंने एक से बढ़कर एक नात-ए-रसूल व मनवकत बाबा सदन की शान में पढ़कर सुनाए।
मुंबई के कव्वाल जुनैद सुल्तानी व बंगलूरू के सईद-फरीदकी महफिल सजी। बंगलूरू के कव्वाल सईद-फरीद ने फन का जादू बिखेरा। नात-ए-रसूल से शुरूआत करते हुए बाबा की शान में एक से बढ़कर एक कलाम पढ़े। सईद-फरीद ने खुदा-ए-पाक की याद में नात-ए-पाक पढ़ी। मनकवत और गीत सुनाए। कव्वाल जुनैद सुल्तानी ने नात-ए-पाक %तुम्हारे है, तुम्हारा है सहारा या रसूल्लाह से... शुरूआत की। जिसे लोगों द्वारा खूब पसन्द किया गया। उन्होंने सबकी किस्मत का चमका दो सितारा या रसूल्लाह...। जब तो हज का महीना लगता है, ख्वाजा का दरबार तो मदीना लगता है...। उन्होंने गजल व गीत पढ़े। सुबह तक महफिल का दौर चलता रहा।
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इस मौके पर शहर पेश इमाम हाजी अब्दुल अलीम, कमेटी संरक्षक पूर्व सांसद सुजान सिंह बुंदेला, अंजुमन सदर असलम कुरैशी, उर्स कमेटी सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, हाजी साबिर अली, अब्दुल रहमान कल्ला, रमजानी दादा, अबरार अली, मोहम्मद नसीम, रिजवान उज्जमा, समीर चौबे, शरद चौबे, मुबीन शबनम, वाकिर अली पार्षद, मोहम्मद जमील बाबू, गिरीश पाठक, समद खान, आसिफ कुरैशी, शकील, शहीद खां मंसूरी, मुश्ताक खान, हाजी अनीस मंसूरी, अख्तर खान, रफीक खान, हाजी इरशाद खान, सरबर खान, रमजान अली, मो.इस्लाम, पप्पू ठेकेदार खालिद, नबाब बख्श आदि का विशेष सहयोग रहा। संचालन जनरल सेकेट्री अजीज कुरैशी ने किया।
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शादियों में 34 जोड़ों ने निकाह कुबूल किया
बृहस्पतिवार को इत्जिमाई शादियों के साथ उर्स का समापन हो गया। आखिर दिन हुई इत्जिमाई शादियों में 34 जोड़ों के निकाह शहर पेश इमाम समेत इमामों द्वारा मुस्लिम रीति रिवाज के साथ कराए गए। जब नए जोड़ों ने कबूल है...कबूल है... कहा तो लोगों ने तालियों से स्वागत कर नव जोड़ों बधाइयां देते हुए उन्हें नई जिंदगी की सफलता के लिए दुआएं दीं।पंजीकृत 34 जोड़ों के निकाह दरगाह परिसर में पेश इमाम द्वारा पढ़ाए गए। पंजीकृत 34 जोड़े अपने रिश्तेदारों के साथ मौजूद रहे। कई दूल्हे तो अपनी बारात लेकर बाबा के दर पर पहुंचे थे।
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