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विदेशी पर्यटक सुविधाओं के अभाव में नहीं रुकते झांसी, अब पर्यटन विभाग कर रहा तैयारी

Sun, 25 Nov 2018 02:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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झांसी
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सर्दी की शुुरुआत होते ही बुंदेलखंड के ऐतिहासिक मंदिरों को देखने के लिए विदेशी मेहमानों का आवागमन शुरू हो गया है। झांसी रेलवे स्टेशन पर दिल्ली से आने वाली गाड़ियों से रोजाना पर्यटकों के जत्थे उतर रहे हैं। महीने में चार से पांच हजार सैलानी आ रहे हैं। लेकिन, सुविधाओं के अभाव में वे झांसी में नहीं ठहरते हैं। बल्कि, यहां से सीधे ओरछा व खजुराहो के लिए रवाना हो जाते हैं।
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विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो, ओरछा के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए पंद्रह जुलाई से पंद्रह सितंबर तक स्पेनिस व इटेलियन ग्रुप भारत आते हैं। इसी तरह अक्तूबर से फरवरी तक अमेरिकन, ब्रिटिश, चाइना, जापान, कोरिया के ग्रुप आते हैं। अधिकतर विदेशी सैलानी निर्धारित कार्यक्रम के हिसाब से शताब्दी एक्सप्रेस से आगरा से झांसी आते हैं और एक दिन खजुराहो में गुजारने के बाद वापस शताब्दी एक्सप्रेस से लौट जाते हैं। कुछ यात्री एक दिन ओरछा व एक दिन खजुराहो में बिताने के बाद लौटते हैं। टूर आपरेटरों ने झांसी का किला व संग्रहालय को चार्ट में शामिल कर रखा है, मगर सुविधाओं के अभाव में यहां पर्यटक नहीं ठहरते हैं।

‘ विदेशी पर्यटकों के टूर प्रोग्राम में झांसी और आसपास के दर्शनीय स्थल भी शामिल हो सकें, इसके लिए प्रयास चल रहा है। टूर कंपनियों से संपर्क किया जा रहा है।’ -आरके रावत, उप निदेशक पर्यटन विभाग।
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संस्कृति का अनोखा संगम
भारत विभिन्न संस्कृतियों का अनोखा संगम हैं। अलग-अलग धर्मों के लोग व रहन सहन देखना उनके लिए एक अलग अनुभव रहा। झांसी शहर को भी देखने की बड़ी इच्छा है। -साइबिल डकलील, यूएसए।

सुना है रानी की वीरता के बारे में
मैंने झांसी रानी की वीरता के बारे में सुन रखा था। आज उनके शहर में आकर अद्भुत महसूस कर रहा हूं। मौका लगा तो उनका किला देखने जरूर जाउंगा। जॉन मिराटिया, यूएसए।
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ये हैं दर्शनीय स्थल

झांसी व आसपास के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए एक दिन का कार्यक्रम और बढ़ाने का सुझाव दिया था, जिसे कंपनी ने गंभीरता से लिया। इसमें झांसी का किला, राजकीय संग्रहालय, ललितपुर का देवगढ़, बरुआसागर झील, बरुआसागर की सब्जी मंडी, गढ़कुंडार व जराय का मठ दिखाने की योजना है।

इन जरूरतों को भी करना होगा पूरा

- पर्यटन विभाग को टूर कंपनियों से संपर्क बढ़ाना चाहिए, ताकि वह सैलानियों को यहां रोकने में रुचि दिखाएं।
- झांसी व आसपास के किसी भी दर्शनीय स्थल के पास रिसोर्ट नहीं हैं, जहां विदेशी सैलानियों को एक साथ ठहराया जा सके।
- दर्शनीय स्थलों तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़कें नहीं हैं, जबकि मध्य प्रदेश में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- लग्जरी होटलों की भी कमी हैं, जहां एक साथ डेढ़ सौ से तीन सौ विदेशी पर्यटकों को एक जगह ठहराया जा सके।
- पर्यटन विभाग को अन्य विभागों का सहयोग नहीं मिल पाता, इस कारण विदेशी सैलानियों को झांसी में ठहराने की कोशिशें आगे नहीं बढ़ पा रही है।

ये भी हैं कारण
टूर आपरेटर्स ने खजुराहो से लौटते समय पर्यटकों को झांसी का किला व संग्रहालय दिखाना भी रूट चार्ट में शामिल कर रखा है। मगर, इन धरोहरों के आसपास शौचालय, रेस्टोरेंट, पार्किंग जैसी सुविधाएं न होने से टूर ऑपरेटर बचते हैं। दूसरा इनको देखने के लिए दो घंटे का समय चाहिए। चूंकि, शताब्दी एक्सप्रेस प्लेटफार्म चार पर आती है। इस कारण प्लेटफार्म तक पहुंचने, लगेज ले जाने व बुक कराने में एक से डेढ़ घंटे का समय जाया हो जाता है। इस कारण भी पर्यटक उक्त राष्ट्रीय धरोहरों को देखने से वंचित रह जाते हैं। टूर आपरेटर्स चाहते हैं कि अगर भोपाल से नई दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस प्लेटफार्म एक नंबर पर आने लगे तो पर्यटकों को झांसी घुमाना शुरू कर दिया जाएगा।
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