कर्ज लाखों का, माफ सिर्फ हजारों का
सब हेड: फसल ऋण मोचन योजना से तमाम किसानों की टूटी आस
- नियमों के मकड़जाल में फंसी योजना
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी/ मोंठ।
विधानसभा चुनाव के पहले भारतीय जनता पार्टी ने किसानों का एक लाख रुपये का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। लेकिन, सरकार बनने के बाद इस योजना को लघु और सीमांत किसानों तक सीमित कर दिया गया। इसमें भी शर्त लगा दी गई। किसानों का 31 मार्च 2016 तक का बकाया कर्ज माफ किया गया। इससे तमाम किसान अपने को ठगा सा महसूस कर रहे थे। उन्होंने सपना लाख रुपये का कर्ज माफ होने का देखा था, परंतु यह राशि सैकड़ों में ही सिमट कर रह गई।
फोटो
मनीष के सिर्फ 931 रुपये माफ
मोंठ तहसील के ग्राम छपार निवासी मनीष कुमार राजपूत के सिर्फ 931 रुपये ही माफ हुए हैं। मनीष ने बताया कि उसके नाम लगभग बारह बीघा जमीन है। 17 जनवरी 2016 को एक लाख छब्बीस हजार रुपये का केसीसी बनवाया था। कार्ड से उसने 31 मार्च 2016 तक कोई लेन-देन नहीं किया था। इस दौरान केसीसी कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में फाइल चार्ज सहित करीब 931 रुपये उसके खाते में 18 मार्च को बकाया के रुप में दर्ज हो गये थे। बस यही धनराशि माफ हुई है। जबकि, उम्मीद थी कि एक लाख का कर्ज माफ होगा। सरकार ने इस योजनाओं में आंकड़ों की बाजीगरी दिखाई है।
फोटो
कर्ज दो लाख, माफ दो हजार
मोंठ के ग्राम शाहजहांपुर के किसान सीताराम ने किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से सर्व यूपी ग्रामीण बैंक से दो लाख रुपये का ऋण लिया था। 31 मार्च 2016 तक उनके खाते में दो हजार दो सौ उनचास रुपये बकाया थे, केवल यही राशि प्रदेश सरकार ने माफ की है। जबकि, सीताराम ने बताया कि इस समय भी उनके खाते में एक लाख तीन हजार रुपये बकाया हैं, लेकिन माफ सिर्फ बाइस सौ ही हुए हैं। प्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ा सपना दिखाया था, लेकिन पूरा नहीं किया।
फोटो
उम्मीद पर खरी नहीं उतरी योजना
मोंठ तहसील के ग्राम विरगुवां के किसान बाबूलाल ने बताया कि उसके नाम साढ़े नौ बीघा जमीन है। उसने मोंठ की सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा से 28 मई 2014 को एक लाख रुपये का क्रेडिट कार्ड बनवाया था। इससे लिए गए ऋण की वह समय-समय पर अदायगी भी करता आया। 31 मार्च 2016 को उसके केसीसी खाते में 1,558 रुपये बकाया था। केवल यही धनराशि ही माफ की गई है। जबकि, उसे उम्मीद थी कि सरकार उसका एक लाख रुपये का कर्ज माफ करेगी।
नहीं खिला उम्मीद का कमल
एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने की घोषणा हुई थी, लेकिन बहुत से किसान ऐसे हैं, जिनका एक हजार रुपये ही माफ हुआ है। गुरसराय के किसान बृजकिशोर के 1,005 रुपये, बरुआसागर के बातूराम के 1,016 रुपये, सेमरी मोंठ के 1,031 रुपये, भंडरा के रामेश्वर प्रसाद के 1,041 रुपये, लोहागढ़ के किसान अफसर अली के 1,056 रुपये और कुरैठा के किसान कल्लू के 1,085 रुपये का कर्ज माफ हुआ। इनके अलावा जिले में ऐसे तमाम किसान हैं, जिनका ऋण मोचन योजना में उम्मीद का कमल नहीं खिल पाया है।
‘शासन ने 31 मार्च 2016 को केसीसी खाते में बकायेदारी को आधार माना है। इसके बाद 31 मार्च 2017 तक खाते में जमा की गई रकम को भी काटकर बकाया माफ किया गया है। इस नियम के आधार पर किसानों को कर्जमाफी का लाभ दिया गया है।’
- रणधीर सिंह, अग्रणी जिला प्रबंधक
दूसरे चरण में 50 हजार किसानों की कर्ज माफी
झांसी। ‘फसल ऋण मोचन योजना’ के अंतर्गत दूसरे चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसमें 50 हजार किसानों को कर्ज माफी के प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि रविवार को इसकी डिमांड तय हो जाएगी।
जिले में लघु और सीमांत (पांच एकड़ जमीन वाले) किसानों की संख्या 1,90,911 हैं। इनका एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ होना है। पहले चरण में 11,055 किसानों का 66.17 करोड़ रुपया माफ हुआ है। इसमें से 5,025 किसानों को जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने ऋण माफी प्रमाण पत्र बांट दिए थे। शेष 6,030 किसानों को तहसील अथवा ब्लाक स्तर पर शिविर लगाकर प्रमाण पत्र बांटे जाएंगे। इसके अलावा दूसरे चरण में 50 हजार किसानों को कर्ज माफी का प्रमाणपत्र देने की तैयारियां चल रही हैं। इनके आधार कार्ड नंबर फीड कर सत्यापन कार्य शुरू हो गया है। बाकी किसानों को तीसरे और अंतिम चरण में कर्ज माफी का प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
दूसरे चरण की तैयारियां शुरू
दूसरे चरण में पचास हजार किसानों को कर्ज माफी का प्रमाण पत्र देने का लक्ष्य है। इसके बाद जो किसान शेष रह जाएंगे, उनको तीसरे चरण में कर्ज माफी का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। दूसरे चरण में भी किसानों का सत्यापन किया जाएगा।
- दुर्गेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी