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नियमित रूप से नहीं लिए जा रहे नमूने

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नियमित रूप से नहीं लिए जा रहे नमूने
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ललितपुर।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को वितरित किए जाने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता व इसमें उपयोग होने वाले खाद्यान्न सामग्री में अनेकों बार अनियमितताएं प्रकाश में आई हैं। इसको गंभीरता से लेते हुए शासन ने खाद्य सुरक्षा विभाग को मध्याह्न भोजन में पके हुए भोजन के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच कराने की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन विभाग द्वारा नियमित रूप से शासन से निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
बीते 21 अगस्त को प्रदेश के ही जनपद शाहजहांपुर में प्राथमिक विद्यालय किशुरिहाई में मध्याह्न भोजन में उपयोग होने वाले चावलों में केमिकल युक्त पाउडर पाया गया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्याह्न भोजन प्राधिकरण उत्तर प्रदेश के निदेशक अब्दुल समद ने समस्त जिलाधिकारियों को मध्यान्ह भोजन में उपयोग होने वाली खाद्यान्न सामग्री व पके हुए भोजन की गुणवत्ता पर नियमित रुप से नजर बनाए रखने व अनुश्रवण करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि जब से यह मध्याह्न भोजन योजना संचालित हो रही है, तभी से ही इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं, कभी पके हुए भोजन में छिपकली व अन्य कीड़ों का मारा पाया जाना, बाजार में बिकने वाले नकली व मिलावटी मसालों और खाद्यान्न सामग्री का उपयोग होना आदि अनियमितताएं सामने आती रही हैं और जो वर्तमान में भी जारी है। इन्हीं तरह की अनियमितताएं पर रोक लगाने के लिए शासन ने वर्ष 2013 में शासनादेश जारी करके समस्त जनपदों के मुख्य खाद्य सुरक्षा विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी थी, कि वह नियमित रुप से मध्याह्न भोजन में उपयोग खाद्यान्न सामग्री व पके हुए भोजन का नमूना लेकर उसकी जांच प्रयोगशाला में कराएं और आरोपी पाए जाने वाले जिला बेसिक शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन सम्बंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करें। गौरतलब है कि इस शासनादेश को जारी हुए लगभग चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक एक विद्यालय का नमूला फेल नहीं हुआ है। सबसे बड़ी तो यह है कि नमूला फेल हो भी कैसे, क्योंकि जनपद में नियमित रुप से नमूने लिए भी नहीं जाते हैं। इसके लिए शासन स्तर से बीच-बीच में जिला प्रशासन व मुख्य खाद्य सुरक्षा विभाग को आदेश भी जारी किए गए हैं, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखाई दिया। चार वर्ष बीत जाने के बाद और सूबे में सरकार बदल जाने के बाद अब कहीं जाकर विभागीय अधिकारियों के कानों पर जूं रेंगा है, लेकिन अभी भी इस प्रक्रिया में रफ्तार नहीं आ सकी है। इस नवीन सत्र 2017-18 में माह अप्रैल से अगस्त तक इन पांच माह में मुख्य खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मात्र 11 परिषदीय विद्यालयों से मध्याह्न भोजन का नमूना लिया गया है।
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बीएसए विभाग को नहीं दी जाती है कोई सूचना
बीते चार वर्षों में अब तक मुख्य खाद्य सुरक्षा विभाग ने जनपद के किन-किन विद्यालयों से मध्याह्न भोजन का नमूना लिया है इसकी कोई भी सूचना विभाग द्वारा जिला बेसिक शिक्षा विभाग को नहीं दी गई है। इसके अलावा अभी तक ऐसा एक भी मामला संज्ञान में नहीं आया है कि जनपद के किसी विद्यालय के मध्याह्न भोजन का नमूना फेल हुआ हो। अब यह भी देखना होगा कि वर्तमान में जो मुख्य खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा नमूने लिए जा रहे हैं, यह कार्रवाई कब तक नियमित रूप से जारी रहती है।
नहीं मिलती कोई सूचना
मुख्य खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अब तक कितने विद्यालयों से नमूने लिए गए हैं और कितने नमूने फेल व पास हुए हैं, इसकी अभी तक कोई जानकारी नहीं है। क्योंकि खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा इस सम्बंध में विभाग को कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है। बीते वर्षों में अभी तक कोई सूचना नहीं दी गई है।
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-कपिल दुबे
जिला समन्वयक, मध्यान्ह भोजन, ललितपुर।
लिए जा रहे हैं नमूने
जनपद के परिषदीय विद्यालय में संचालित मध्याह्न भोजन के नमूने भरे जा रहे हैं। इस सत्र में अभी तक 11 विद्यालयों से नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए गए है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- कमल निवास त्रिपाठी
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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