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आग बुझाने के यंत्र तो हैं पर पानी के इंतजाम नहीं
- नर्सिंगहोमों की जांच जारी, मिलीं बड़े पैमाने पर खामियां
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
लगातार पांचवें दिन फायर ब्रिगेड विभाग ने शहर के कई नर्सिंग होमों की जांच की। इसमें सामने आया कि अस्पतालों में टैंक से पाइप लाइन की व्यवस्था नहीं कराई है। हालांकि, अग्निशमन यंत्र लगवाए हैं। अग्निशमन विभाग ने नर्सिंगहोमों को जल्द से जल्द पाइप लाइन लगवाने के निर्देश दिए हैं। नहीं तो कार्रवाई की जाएगी।
शुक्रवार को मुख्य अग्निशमन अधिकारी महावीर सिंह ने अपनी टीम के साथ शहर नजा, हाईटेक ट्रामा सेंटर, साईं आस्था, मां वैष्णों, निर्मल अस्पताल में सुरक्षा के इंतजामों की जांच पड़ताल की। उन्होंने बताया कि कनकने को छोड़कर किसी भी अस्पताल में पाइप लाइन की व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि, सभी जगह अग्निशमन यंत्र जरूर लगे मिले। उन्होंने कहा कि पाइप लाइन की व्यवस्था कराने के लिए नर्सिंग होमो को पंद्रह दिन का समय दिया गया है। पंद्रह दिन बाद एक बार फिर जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि शनिवार को भी अस्पतालों की जांच जारी रहेगी।
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इसलिए जरूरी है पाइप लाइन
अग्निशमन यंत्र तुरंत चिंगारी, शॉर्ट सर्किट आदि से आग लगने पर उसको बुझा सकते हैं। इसके अलावा जनरेटर, एसी, कंप्यूटर, पंखे, मशीनों समेत विभिन्न उपकरणों की आग बुझाने में भी यंत्र का प्रयोग किया जाता है। मगर बड़ी आग लगने पर अग्निशमन यंत्र काम नहीं आएंगे। काफी क्षेत्र में आग फैलने पर पाइप लाइन के जरिए टैंक का पानी इस्तेमाल होगा। तभी आग बुझाई जा सकेगी। इसलिए अग्निशमन यंत्र के साथ ही टैंक से पाइप लाइन को जोड़ना भी जरूरी है।
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ये हैं टैंक के मानक
बिल्डिंग बनाते समय पानी का टैंक बनाने का भी मानक है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी के मुताबिक 500 स्क्वॉयर मीटर क्षेत्र में बीस हजार लीटर पानी की क्षमता वाला टैंक बना होना चाहिए। वहीं, इससे कम क्षेत्रफल पर दस हजार लीटर पानी की क्षमता का टैंक बनाना जरूरी है।