सहायक हटे, सन्नाटे में लाखों की टिकट मशीनें
झांसी। रेलवे स्टेशन की ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन पर सर्विस फेसिलेटर (टिकट सहायक) का अनुबंध खत्म होने से मशीनों पर सन्नाटा पसर गया है। औसतन प्रतिदिन जिन मशीनों से एक हजार से अधिक टिकट बनते थे, अब एक दिन में तीन से सात टिकट ही बन रहे हैं। यात्रियों की टिकट निकालने में कोई मदद नहीं कर पा रहा है। यात्री लंबी कतार में टिकट लेने को मजबूर हैं।
रेलवे स्टेशन पर 10 जून 2017 से छह ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन का संचालन शुरू हो गया था। इसके लिए यात्री को 70 रुपये में स्मार्ट कार्ड बनवाने के बाद मोबाइल की तरह रिचार्ज कराना है और इसके बाद वह देश के किसी भी स्टेशन के लिए मशीन से जनरल टिकट निकाल सकता है। यात्रियों को जागरूक और टिकट लेने में मदद करने के लिए टिकट सहायक (60 से 65 साल के बीच के सेवानिवृृत्त कर्मचारी) रखे गए थे, लेकिन 31 मार्च को उनका अनुबंध खत्म हो गया। इससे मशीनों पर अब यात्रियों की मदद करने वाला कोई नहीं रह गया है। चूंकि, मशीनों के संचालन की जानकारी यात्रियों को नहीं है। इस कारण वह इनका सीधा लाभ नहीं ले पाते हैं। इन मशीनों से एक अप्रैल को सात और दो अप्रैल को मात्र तीन टिकट निकले। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि दोबारा टिकट सहायक रखने के लिए प्रशासनिक कार्यवाही चल रही है। जल्द ही इनकी नियुक्ति हो जाएगी।
ये भी हैं दिक्कतें
- जहां मशीन लगी हैं वहां न तो पंखे लगे हैं और न बैठने की व्यवस्था।
- रीचार्ज खत्म होने पर तुरंत भरवाने की व्यवस्था नहीं।
- टिकट वापसी की अलग से व्यवस्था नहीं, कतार में लगो।
- तीन घंटे से अधिक लेट होने पर वापस नहीं मिलता किराया।
- मशीन में टिकट रोल खत्म होने पर इंतजार करो।
प्रतिदिन बिकते हैं 20 हजार टिकट
झांसी रेलवे स्टेशन पर औसतन प्रतिदिन 20 हजार अनारक्षित टिकट बिकते हैं। इनमें 12 हजार के करीब बुंदेलखंड के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्री रहते हैं। ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन से अभी प्रतिदिन एक हजार से अधिक टिकट बिक रहे थे।
41 मशीनें लगीं
रेल मंडल में झांसी समेत 24 स्टेशनों पर 49 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन लगनी हैं। इनमें 41 मशीनें लगा दी गई हैं। इसमें बांदा, मुरैना, ललितपुर, महोबा, चित्रकूट धाम, उरई के अलावा मानिकपुर, बबीना, डबरा, दतिया, अतर्रा, खजुराहो, हरपालपुर, शंकरगढ़, मऊरानीपुर, भिंड, रागौल, भरूआ सुमेरपुर, पुखरायां, घाटमपुर, डभौरा और बिरलानगर स्टेशन पर मशीन लगाई गई हैं।