गांवों व सड़कों पर छुट्टा घूम रहीं गायों को सहारा मिलेगा। इनकी गिनती शुरू हो गई है। जिन लोगों की गायें होंगी उनको घर पर बांधना जरूरी होगी। बाकी गाय व अन्य पशुओं के लिए गो आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। 18 जनवरी को सौ गांवों में गो आश्रय स्थलों का भूमिपूजन होगा। इतना ही नहीं, गोसंरक्षण सम्मेलन के अंतर्गत विद्यालय स्तर से लेकर जिलास्तर तक प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। यह प्रतियोगिताएं 16 जनवरी से शुरू होंगी। गो संरक्षण समितियों को इनकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विकास भवन सभागार में हुई बैठक में जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने कहा कि निर्माणाधीन गोआश्रय स्थल पर कंटीले तार न लगाए जाएं। सभी नोडल अधिकारी भूमिपूजन के समय मौजूद रहें। यदि किसी और को मौके पर भेजा तो कार्रवाई की जाएगी। सभी नोडल अधिकारी गांवों का भ्रमण कर जमीन देख लें।
गांवों में खुली बैठक कर छुट्टा जानवरों से होने वाले नुकसान की जानकारी गांव वालों को दे दें। उन्हें जागरूक करें कि जानवरों को छुट्टा न छोड़ें। यह कार्य जनसहभागिता से होगा। गोआश्रय स्थल पर भूमि पूजन के 10 दिन बाद काम शुरू होगा। यह काम मनरेगा से कराया जाएगा। आश्रय स्थल पर किसी छुट्टा जानवर की मौत न हो। गोआश्रय स्थल का संचालन और स्वामित्व ग्राम सभा का रहेगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. एनके पांडेय ने कहा कि गोसंरक्षण सम्मेलन को लेकर प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाएंगी। 16 जनवरी को विद्यालय स्तर, 17 को ब्लाक व तहसील स्तर, 18 जनवरी को जिलास्तर पर प्रतियोगिताएं होंगी। इनमें कक्षा एक से लेकर महाविद्यालय तक के छात्र- छात्राएं हिस्सा ले सकते हैं। इसमें गोवंश पर आधारित निबंध भारतीय अर्थव्यवस्था तथा गोसंरक्षण पर प्रतियोगिता, वाद- विवाद में कृषि गोसंरक्षण प्रतियोगिता व चित्रकला में गोवंश एवं कृषि विषय शामिल हैं।
इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी निखिल टी. फुंडे, एसडीएम सदर अनुनय झा, डीडीओ उग्रसेन सिंह यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर, परियोजना निदेशक डॉ. आरके गौतम मौजूद रहे।
स्पष्टीकरण मांगा
छुट्टा जानवरों को लेकर आयोजित की गई महत्वपूर्ण बैठक में एसडीएम और तहसीलदार मोंठ के अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांगा है।