कुश्ती में चंडीगढ़ के पहलवानों का दबदबा
सब हेड - अर्जुन, आदर्श के अलावा सुमित, मंदीप ने जीते मुकाबले
क्रासर - विद्या भारती का राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
रविवार को भानी देवी गोयल इंटर कॉलेज में विद्या भारती की ओर से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की तीन दिवसीय कुश्ती प्रतियोगिता के पहले दिन चंडीगढ़ के पहलवानों का दबदबा रहा। चंडीगढ़ के अर्जुन और मोहित ने प्रभावशाली प्रदर्शन कर अपने मुकाबले जीते।
मेट पर हुई कुश्ती के उद्घाटन मुकाबले में 84 किलो भार वर्ग में चंडीगढ़ के मोहित ने गाजियाबाद के आदर्श क ो 12-2 प्वाइंट से हराया। चंडीगढ़ के ही अर्जुन ने भी बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर जबलपुर के गणेश को मुकाबले में हावी नहीं होने दिया। अर्जुन ने गणेश को 8-2 से हराया। अन्य मुकाबलों में 32 किलो भार वर्ग में जबलपुर के अंश गौड़ ने चंडीगढ़ के सौरभ को कडे़ संघर्ष में 15-14 से, 45 किलो भार वर्ग में भीलवाड़ा के सुमित ने बुलंदशहर के सनी को 11-0 से तथा भरतपुर के मंदीप ने सुनील को हराया।
इससे पहले कुश्ती प्रतियोगिता का उद्घाटन हनुमान जी की पूजा अर्चना के साथ हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि रेलवे के मंडलीय वरिष्ठ वित्त नियंत्रक वीके तिवारी ने कहा कि खेलों के माध्यम से विद्यार्थी अपना कॅरियर बना सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डोमेश्वर साहू जी ने कहा कि विद्या भारती पढ़ाई के अलावा शारीरिक शिक्षा को भी प्रमुखता से महत्व देती है। विद्या भारती के खिलाड़ियों ने कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेडल जीते है। क्षेत्रीय शारीरिक प्रमुख पूर्वी उत्तर प्रदेश जगदीश कुमार सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता में करीब 200 पहलवान हिस्सा ले रहे है। इस अवसर पर अरविंद कपूर, रणवीर सिंह, भारतीय शिक्षा समिति कानपुर प्रांत के प्रांतीय मंत्री राकेश निरंजन, प्रदेश निरीक्षक रामशंकर यादव, मीडिया प्रभारी हरीशचंद्र गुप्ता, बृजेंद्र चक्रवर्ती, रघुवीर शरण रावत, प्रधानाचार्य अवध किशोर गुप्ता, संजीव दुबे, डा. यूपी सिंह, पवन कुमार द्विवेदी, मानसिंह निराला आदि मौजूद रहे।
कुश्ती में है भविष्य
कुश्ती में भविष्य है और इसमें आवश्यकता है अधिक से अधिक मेहनत करनी की। फिल्मों ने कु श्ती का जमकर प्रचार प्रसार किया है। यही कारण है कि कुश्ती में एक बार फिर युवाओं में रुचि बढ़ गई है।
आदर्श पहलवान निवासी लोनी
कम उम्र में सीखे दांव पेच
घर मेें कुश्ती को लेकर हमेशा जागरूकता रही है। पिताजी भी राष्ट्रीय के स्तर के बडे़ पहलवान रहे है। यही कारण है कि दस वर्ष की उम्र से पहलवानी के दांव पेंच सीखने के लिए अखाडे़ में कूद पड़ा।
मोहित निवासी चंडीगढ़