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मेडिकल कॉलेज पर ऑक्सीजन की 35 लाख उधारी-City

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मेडिकल कॉलेज पर ऑक्सीजन की 35 लाख उधारी
- रोजाना 120 से 150 बड़े सिलेंडर की है खपत
- जुलाई में कंपनी दे चुकी सप्लाई बंद की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर भी ऑक्सीजन गैस की 35 लाख रुपये उधारी है। जुलाई में गैस सप्लाई करने वाले कंपनी ने पत्र लिखकर सप्लाई बंद करने तक की चेतावनी तक दे दी है। इसके बावजूद अब तक भुगतान लटका हुआ है।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं होने से 50 मौतों के बाद अमर उजाला ने झांसी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन गैस को लेकर पड़ताल की। पड़ताल में सामने आया कि मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए पिछले साल टेंडर हुआ था। इस बार ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया पूरी न हो पाने की वजह से अब तक पुरानी कंपनी से ही ऑक्सीजन की सप्लाई ली जा रही है। मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन गैस के लिए पांच प्लांट हैं। इसमें वार्ड में तीन, इमरजेंसी और निक्कू में एक-एक प्लांट है। इन्हीं प्लांट में सिलेंडर रखकर ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है। कॉलेज में रोजाना 120-150 बड़े सिलेंडरों की खपत होती है। एक बड़े सिलेंडर की कीमत 200 रुपये से अधिक है। इसके अलावा प्रतिदिन चार से पांच छोटे नाइट्रस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। इनकी कीमत पांच-छह हजार रुपये है। हर महीने लगभग दस लाख रुपये की ऑक्सीजन की खपत होती है। मौजूदा समय में मेडिकल कॉलेज पर ऑक्सीजन की 35 लाख रुपये उधारी हो गई है। जुलाई में कंपनी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखकर उधारी का जल्द भुगतान कराने की मांग की है। नहीं तो सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी है। कंपनी की पिछले साल की बकाएदारी ही 22 लाख रुपये है। गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन की बेहद जरूरत होती है।
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बॉक्स..
नहीं आता अलग बजट
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के लिए शासन द्वारा अलग से बजट नहीं भेजा जाता है। कॉलेज को औषधी एवं रसायन मद में साल भर में अब तीन से साढ़े तीन करोड़ रुपये बजट मिलता है। इसमें से दवाओं, केमिकल की खरीद के साथ ही ऑक्सीजन भी मंगवानी पड़ती है। बताया गया कि साल भर ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए एक से सवा करोड़ रुपये की जरूरत है।
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वर्जन..
नहीं है ऑक्सीजन की कमी
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। ऑक्सीजन गैस के संबंध में समीक्षा बैठक बुलाई थी। इसमें बकाएदारी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। कंपनी ने नोटिस दिया है मगर उसे अप्रैल में भुगतान भी किया गया है। यहां पर कंपनी ऑक्सीजन की सप्लाई बंद नहीं करेगी। दो-तीन बार शासन से बजट मांगा जा चुका है। अब फिर पत्र लिखा जा रहा है। - डॉ. एनएस सेंगर।
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