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निकला मातमी जुलूस, गूंजा ‘हाय हुसैन हम न हुए’
मुहर्रम की आठवीं पर शिया समुदाय ने याद की कर्बला की शहादत
मजलिस में बच्चों की शिक्षा पर दिया गया जोर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
मुहर्रम की आठवीं तारीख पर शुक्रवार को शिया समुदाय ने मातमी जुलूस निकालकर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। जुलूस में मातमी धुनों के बीच हाय हुसैन हम न हुए की सदाएं गूंजी। इसके पूर्व इतवारी गंज में हुई संगोष्ठी में बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का आह्वान किया गया।
शिया मोहल्ले के इमामबाड़े से शुरू हुआ जुलूस महानगर के विभिन्न रास्ते से होता हुआ इतवारी गंज पहुंचा। इस दौरान कर्बला की जंग का मार्मिक मंजर बयान कर उलेमाओं ने मौजूद लोगों की पलकें भिगो दीं। वक्ताओं ने कहा कि जुल्म चाहें कितना ही शक्तिशाली हो, एक दिन उसका नाम मिटता जरूर है। हुसैन ने शहादत का रास्ता चुन हमेशा के लिए स्वयं को अमर कर लिया। कर्बला में हुसैनी खेमों की औरतों ने मुसीबत में हिम्मत न हारने की तालीम दी थी। उनकी जिंदगी हमेशा यही संदेश देती है कि मुसीबतें देखकर भी हक बात से पीछे नहीं हटना चाहिए।
इससे पूर्व दोपहर में इतवारीगंज मोहल्ले में हुई संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि समाज के विकास के लिए जरूरी है कि हम सभी अपने बच्चों को अच्छे संस्कार और उच्च शिक्षा दिलाएं। शिक्षा के बिना समाज के विकास की कल्पना बेमानी है। इस मौके पर इंजीनियर कासिम, आबिद, सईद, अस्करी नवाब, अब्बास, अल्बाश आब्दी, साजिद मेहंदी, मौलाना अली हैदर, अली समर, अनवर, रईस अब्बास आदि मौजूद रहे। संचालन सैय्यद शहंशाह हैदर आब्दी ने किया।