भक्तों को दर्शन देने मंदिर से निकलेंगे भगवान
सबहेड: शनिवार को जलविहार करेंगे महानगर के 19 मंदिरों में विराजमान विग्रह
क्रासर -
गणेश प्रतिमाएं भी होगी विसर्जित, अखाड़ों और चाचर नृत्य का प्रदर्शन करेंगे युवा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
महानगर में जलझूलनी एकादशी शनिवार क ो मनाई जाएगी। 19 मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रहों विमान में बैठाकर भक्त जलविहार के लिए लक्ष्मी तालाब ले जाएंगे। शहर में पूरी रात उत्सव का माहौल होगा। चाचर नृत्य और आखाड़ों क ा प्रदर्शन युवा करेंगे। वहीं कई गणेश प्रतिमाएं भी लक्ष्मी तालाब सहित विभिन्न जलाशयों पर विसर्जित होगी।
सौ वर्षों से भी पुरानी जल विहार शोभायात्रा की परंपरा शहर में कायम है। जलझूलनी एकादशी को शाम होते ही मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रह चांदी, तांबे, पीतल के बने विमानों में बैठकर गंधीगर के टपरा पर ढोल नगाढ़ों और बैंड की भक्ति धुनों के बीच एकत्र होने लगते हैं। अधिकांश विमानों को श्रद्धालु कंधों पर लेकर चलते हैं। मेला जल विहार कमेटी के कृष्ण चंद्र शर्मा नारद ने बताया कि मान्यता है कि वर्षा ऋतु में पानी गंदा हो जाता है। लेकिन एकादशी पर भगवान के जलाशयों में जल बिहार के बाद उसका पानी निर्मल होने लगता है। शोभायात्रा में सभी समाजों के मंदिरों के विमान निकलते है। कंधों पर विमान लेकर चलने से मूर्तियां झूलती है। ऐसे में एकादशी को जल झूलनी कहा जाता है।
इन मंदिरों के विग्रह करेंगे जलविहार
महानगर में विभिन्न समाजों के 19 मंदिरों के देवी-देवताओं के विग्रह लक्ष्मी तालाब पर जल विहार के लिए जाएंगे। मेला जल विहार कमेटी के महामंत्री मुकेश अग्रवाल के मुताबिक इनमें श्री महंत जी का मंदिर, श्री बांके बिहारी जी का मंदिर, हयारण समाज का राम जानकी मंदिर, श्री लूला बाबा का मंदिर, साहू समाज का राम जानकी मंदिर, नामदेव समाज का श्रीराम जानकी मंदिर, खटीक समाज का श्री राम जानकी मंदिर, कोरी समाज का श्री राम जानकी मंदिर, चौरसिया समाज का राम जानकी मंदिर, मैथिल समाज का राधा कृष्ण मंदिर, रविदास समाज का राधा कृष्ण मंदिर, झा समाज का राम जानकी मंदिर, खुशीपुरा का राधा कृष्ण मंदिर, मुल्लू माते का मंदिर, सागर गेट स्थित राधा कृष्ण मंदिर, अंजनी माता बाहर बड़ागांव गेट स्थित राम जानकी मंदिर, कुशवाहा समाज का राम जानकी मंदिर, कोष्टा समाज का राम जानकी मंदिर, शाक्यवार कोरी समाज का मंदिर है।