अदालत में बयान से मुकरना पड़ा भारी
झांसी। दलित के साथ मारपीट, गाली गलौज कर गंभीर रूप से घायल करने एवं जान से मारने की धमकी के मामले में वादी व गवाहों को बयान से मुकरना भारी पड़ गया। अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश एससी व एसटी एक्ट शकील अहमद खान की अदालत ने वादी व गवाहों के खिलाफ मुकदमा के आदेश दिए हैं।
पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बीके राजपूत के अनुसार सात जुलाई 2010 को प्रेम नारायण निवासी रेल गंज पुलिया नंबर नौ ने तहरीर देते हुये बताया था कि सुबह वह अपने घर पर थे। इसी बीच पड़ोसी महेश अपने भाई व पिता के साथ आकर गाली गलौज, जाति सूचक शब्दों से अपमानित कर मारपीट करने लगे। पुत्र राजन व संजय ने बचाने का प्रयास किया तो सभी ने लाठी लुहांगी से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके बाद सभी जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। थाना प्रेमनगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। जहां वादी प्रेम नारायण व उसके पुत्र राजन और राजेंद्र के बयानों से मुकर जाने पर अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश एससी व एसटी एक्ट शकील अहमद खान की अदालत ने अभियुक्त डिब्बू उर्फ देवी सिंह, महेश यादव व सुनील यादव को दोषमुक्त करते हुये वादी व उसके दोनों पुत्रों के विरूद्ध धारा 344 के तहत कार्यवाही के आदेश दिए हैं।