श्रेणी - कृषि
------------
फोटो (मूंग और उर्द की खराब फसल दिखाता किसान)
...................................................................................
रूठी कुदरत, सूखे ने फिर दी दस्तक
सब हेड... जून, जुलाई और अगस्त में सामान्य से बेहद कम हुई बारिश
- सितंबर में भी बारिश का सही नहीं है रिकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। सूखे ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। इसका अंदाजा इस मानसूनी सीजन जून, जुलाई और अगस्त में हुई सामान्य से कम बारिश से लगाया जा सकता है। आखिरी उम्मीद सितंबर के महीने पर टिकी हुई है। लेकिन, सितंबर में बारिश का पिछला रिकार्ड निराशाजनक ही रहा है।
जिले का दैवीय आपदा से पुराना नाता रहा है। 2014 और 2015 में लगातार दो सालों तक खेत सूखे की आग में झुलसे थे। गांव-गांव में मौत का तांडव देखने को मिला था। साठ से अधिक किसानों ने आत्महत्या की थी। पानी और रोजी-रोटी की तलाश में हजारों ग्रामीणों का पलायन हुआ था। हालांकि, 2016 में बारिश ठीक होने की वजह से हालात कुछ संभल गए थे। लेकिन, अब एक बार फिर त्रासदी आन खड़ी हुई है। जून, जुलाई और अगस्त माह में हुई कम बारिश से यह स्थिति बन गई है। इन तीन महीनों में सामान्य बारिश का आंकड़ा 648.30 मिमी है, जबकि इस बार पानी सिर्फ 330.17 मिमी ही बरसा है। आखिरी आस सितंबर की बारिश से है। लेकिन, इस महीने की शुरुआत सूखी ही हुई है। इसके अलावा सितंबर में बारिश का पिछले पांच सालों का रिकार्ड अच्छा नहीं रहा है। सितंबर में बारिश का सामान्य आंकड़ा 148.90 मिमी है, परंतु पिछले पांच साल के दरम्यान एक बार भी यह आंकड़े तक पानी नहीं पहुंच पाया है। इस माह में सर्वाधिक बारिश 2014 में 95.60 मिमी हुई थी। पिछले साल 12.04 मिमी ही पानी गिरा था।
2013 के बाद नहीं हुई झमाझम
पिछले पांच सालों में सर्वाधिक बारिश 2013 में हुई थी। इस साल सामान्य से कहीं अधिक 1288.88 मिमी पानी गिरा था। जून, जुलाई और अगस्त के तीन महीनों में ही सामान्य बारिश के साल भर के रिकार्ड 879.10 मिमी से अधिक बारिश हो गई थी। हालांकि, इस साल भी सितंबर में सिर्फ 31.3 मिमी ही पानी गिरा था।
सर्वे रिपोर्ट का इंतजार
सूखे की आहट के साथ ही प्रशासन सक्रिय हो गया है। कम बारिश से हुए नुकसान का आंकलन किया जाने लगा है। तहसील स्तर पर टीमें इस काम में जुटी हुई हैं। इसकी रिपोर्ट आने पर ही मुआवजा तय होगा। इसकी माह रिपोर्ट आने की संभावना जताई जा रही है।
आगे की फसल का रखें ख्याल
कृषि मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. मुकेश चंद्र ने बताया कि इस साल सामान्य बारिश का अनुमान था, लेकिन स्थिति ठीक नहीं रही है। कम बारिश से उर्द, मूंग की फसलों को खासा नुकसान हुआ है। लेकिन, अब आगे की फसल सोयाबीन, मूंगफली और तिल का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। सिंचाई स्प्रिंकलर से की जाए। इससे कम पानी में अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
जून, जुलाई और अगस्त में हुई बारिश के आंकड़े (मिमी में)
.....................................................................................
सामान्य - 648.30
2012 - 596.72
2013 - 997
2014 - 329.06
2015 - 379.78
2016 - 528.09
2017 - 330.17
फोटो (किसान हरपे और बाबूलाल) ...
खेतों में मंडराने लगा संकट
कम बारिश का असर खेतों में नजर आने लगा है। पानी की कमी की वजह से मूंग और उड़द की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। तेज धूप की वजह से जिले के ज्यादातर इलाकों में फसलें सूख गई हैं। केवल वहां ही फसलों की स्थिति ठीक है, जहां पानी की उपलब्धता है। किसानों के सिर पर संकट मंडरा रहा है।
मऊरानीपुर तहसील के ग्राम भटपुरा के वृद्ध किसान हरपे ने बताया कि उसने एक एकड़ जमीन में उर्द और मूंग की फसल बोई थी। उम्मीद थी कि अच्छी बारिश होगी, लेकिन हुआ इसके उलट। नतीजतन, फसल बर्बाद हो गई है। किसान बाबूलाल की भी कमोबेश यही स्थिति है। उन्होंने बताया कि ढाई एकड़ में फसल बोई गई फसल खराब हो गई है। फसल की बुवाई में खर्च किया गया पैसा भी नहीं निकला है। रबी की बुवाई का संकट खड़ा हो गया है।