क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान की औषधीय खेती को कार चालकों द्वारा रौंदे जाने के मामले पर संस्थान ने एक हजार रुपये अर्थ दंड लगाया है। साथ ही टूटे हुए पानी की पाइप को बदलवाकर नया लगवा लिया है। संस्थान अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में अब दोबारा यहां पार्किंग की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ने कई एकड़ अपनी जमीन पर एलोवेरा, शतावरी, सरपूंरवा, कंचवार, वायक, अर्जुन, नीम, कदंव, गंभारी, सप्तपर्ण, सालपर्णी, प्रिश्राणी, गिलोय के बीज बोए हैं। इन औषधियों की मदद से कई गंभीर बीमारियों की दवाएं तैयार होनी हैं। बीते बुधवार को जमीन के ठीक सामने एक विवाह घर में में पार्किंग न होने से गाड़ियों को संस्थान की खली जमीन पर खड़ी करने की अनुमति दी गई थी। कार चालकों ने मनमर्जी से गाड़ियां करते हुए दर्जनों कारों ने पृष्णपर्णी और शतावरी के पौधों को नुकसान पहुंचाया था। इसके अलावा पाइप पर गाड़ी चढ़ाकर तोड़ दिया। संस्थान के अनुसंधान अधिकारी डॉ. रमाशंकर ने नुकसान के आंकलन के निर्देश अधीनस्थों को दिए थे। शनिवार को जांच पूरी हो गई। अनुसंधान अधिकारी ने बताया कि पार्किंग की अनुमति लेने वाले व्यक्ति पर एक हजार रुपये अर्थदंड लगाने के साथ ही नए पाइप मंगवाया गया है। अब किसी को भी भविष्य में संस्थान की जमीन पर पार्किंग नहीं करने दी जाएगी।