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भारतीय हॉकी के सौ साल: दद्दा की कर्मभूमि झांसी में लिखी गई पहला स्वर्ण दिलाने की पटकथा

Fri, 07 Nov 2025 01:55 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी

सार

हॉकी में झांसी का विशेष योगदान रहा है। ओलंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने का श्रेय झांसी को जाता है। मेजर ध्यानचंद ने तीन, उनके छोटे भाई रूप सिंह ने दो स्वर्ण पदक जीते थे।
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मेजर ध्यानचंद - फोटो : Twitter
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विस्तार
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भारतीय हॉकी ने 7 नवंबर को अपने 100 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं। राष्ट्रीय खेल हॉकी की इस शताब्दी यात्रा में वीरों की भूमि झांसी का योगदान भी स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। यहां की मिट्टी ने उस खिलाड़ी को तराशा, जिसने हॉकी को भारत की पहचान बना दिया। उनका नाम है मेजर ध्यानचंद। उन्हें हॉकी का जादूगर भी कहा जाता है। उन्होंने अपनी अद्भुत कलात्मकता से भारत को तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाए।
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इसी विरासत को आगे बढ़ा रहा है मेजर ध्यानचंद स्टेडियम, जो झांसी में युवा खिलाड़ियों की नर्सरी बन चुका है। यहां रोजाना सैकड़ों नवोदित खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। ये खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। महान हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद की स्मृति में मेरठ में देश का पहला खेल विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है। यह न सिर्फ हॉकी के स्वर्ण युग को सलाम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को खेल के जरिये राष्ट्र निर्माण का संदेश भी देता है।

हॉकी के सौ साल पूरे होने पर शहर के खिलाड़ी भी गर्वित हैं। उनका मानना है कि झांसी की पहचान सिर्फ वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई तक सीमित नहीं, बल्कि मैदान में डटे उन सैकड़ों खिलाड़ियों तक भी है जिन्होंने हॉकी को यहां की परंपरा बना दिया। महिला हॉकी में भी झांसी की ज्योति सिंह जैसी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना लोहा मनवाया। हाॅकी की सदी का यह सफर बताता है कि जब तक मैदान पर हॉकी की स्टिक गूंजती रहेगी, तब तक झांसी का नाम भारतीय हॉकी के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा।
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जीते थे छह पदक
हॉकी में झांसी का विशेष योगदान रहा है। ओलंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने का श्रेय झांसी को जाता है। मेजर ध्यानचंद ने तीन, उनके छोटे भाई रूप सिंह ने दो स्वर्ण पदक जीते थे। अपने पिता की परंपरा को निभाते हुए उनके पुत्र अशोक ध्यानचंद ने एक कांस्य पद प्राप्त किया था।


25 पुरुष तो पांच महिलाओं ने भी पाई ख्याति
झांसी की धरती ने हॉकी के क्षेत्र में यूं तो सैकड़ों खिलाड़ी पैदा किए। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बात करें तो 25 पुरुष और पांच महिलाओं ने अपने खेल का जलवा बिखेरा। आठ खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किया। सुबोध खंडेकर, अब्दुल अजीज, जगदीश यादव, जमशेर खान, तुषार खंडेकर व नेहा सिंह ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल की छाप छोड़ी। जबकि, जूनियर खिलाड़ियों में केपी यादव, वीरेंद्र सिंह, अब्दुल आहद, ज्योति सिंह, केतन कुशवाहा, सौरभआनंद व शिवम आनंद रहे।

यह बोले अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खिलाड़ी
भारत की ओर से एशियाई खेल, वर्ल्ड कप, चैंपियन ट्राफी में प्रतिभाग करने के साथ लक्ष्मण अवार्ड प्राप्त कर चुके अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अब्दुल अजीज ने कहा कि हॉकी को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदम सराहनीय हैं। इससे नवोदित खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ेगा, और जो खिलाड़ी यह खेल छोड़ चुके हैं, वे इस ओर फिर से वापस होंगे।

वर्तमान में वर्ल्ड कप खेलने जा रहे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सौरभ आनंद एशियाई कप में गोल्ड मेडल और जौहर कप में सिल्वर मेडल अपनी टीम को दिला चुके हैं। उन्होंने हॉकी के 100 साल पूरे होने पर खिलाड़ियों के लिए गर्व की बात कही है। सरकार की ओर से जो खिलाड़ियों के सम्मान की योजना बनाई, उसकी भी सराहना की। कहा कि पूर्व में सरकार की ओर से ज्यादा सुविधाएं नहीं थीं, अब सरकार के सहयोग से खिलाड़ी नित्य नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जमशेर खान ने कहा कि हॉकी के 100 साल पूरे होना हम लोगों के लिए गर्व की बात है। हॉकी का ग्राफ बीच में गिरने लगा था, लेकिन अब सरकार की ओर से मिले प्रोत्साहन की वजह से हॉकी उच्च मुकाम पर पहुंच गई है। नवोदित खिलाड़ी भी यदि मेहनत करें तो उन्हें भी आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
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