झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों का डाटा ऑनलाइन होने की वजह से लगभग सौ शिक्षक जांच के फेर में फंस गए हैं। बीयू प्रशासन ने इन सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जांच बढ़ने पर कई शिक्षकों पर शिकंजा कस सकता है।
शासन ने प्रदेश के सभी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों का ब्योरा ऑनलाइन करने के लिए कहा है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों का डाटा ऑनलाइन कर जैसे ही पड़ताल खुली तो लगभग 100 शिक्षक जांच के फेर में फंस गए हैं। इन शिक्षकों का नाम और पिता का नाम हूबहू या फिर काफी मिलता-जुलता मिलने पर नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में जवाब मांगा गया है। कॉलेजों से भी शिक्षकों के बाबत जानकारी मांगी गई है। जवाब आने के बाद कई शिक्षकों पर शिकंजा कस सकता है। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने शिक्षकों से दूसरी यूनिवर्सिटी के किसी भी कॉलेज में पंजीकरण न होने का प्रमाणपत्र भी मांगा है। इस मामले में कुलसचिव नारायण प्रसाद ने बताया कि सभी कॉलेजों के शिक्षकों की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। कई शिक्षकों को नोटिस भी जारी किया गया है। जवाब आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संबद्धता के लिए किया जाता खेल
कई कॉलेज संचालकों ने संबद्धता पाने के लिए कई स्कूलों में एक ही शिक्षक के नाम में हल्का बदलाव कर दर्शा दिया है। चूंकि, अब तक विश्वविद्यालय में ऑफलाइन ब्योरा दर्ज किया जाता रहा है, ऐसे में मॉनीटरिंग सही तरीके से नहीं हो पाई। कभी कभार शिकायत भी हुई तो सेटिंग से मामले को रफादफा करा दिया गया। ऐसे में बाद में लोगों ने शिकायतें तक करनी बंद कर दी मगर अब शासन ने सीधे संज्ञान लिया है, तो परत दर परत फर्जीवाड़ा खुलता जा रहा है।
ऐसे बचने का तरीका ढूंढ रहे कॉलेज
ऑनलाइन डाटा में खुद को फंसता देख कई कॉलेजों ने बचाव का तरीका भी ढूंढ लिया है। जांच में कॉलेज संचालक कह रहे हैं कि संबंधित शिक्षक उनके यहां पहले ही नौकरी छोड़ चुका है और वह समय रहते इसकी सूचना देना भूल गए। अब यदि एक कॉलेज से शिक्षक के खाते में वेतन जा रहा होगा और दूसरे में नकद भुगतान किया जा रहा होगा, तब पकड़ में आना मुश्किल है। सिर्फ आगे चलकर सीटें कम हो सकती हैं।