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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: सोशल मीडिया बना पुलिस का अलर्ट सिस्टम, नौ महीने में 20 लोगों की बची जान

Thu, 10 Sep 2026 11:12 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।

सार

जौनपुर जिले की पुलिस के लिए सोशल मीडिया अलर्ट सिस्टम बन गया। इसके माध्यम से पुलिस को खतरे की आहट मिली तो आत्महत्या करने से पहले पुलिस ने 20 लोगों को बचा लिया। 
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पुलिस ने 20 लोगों की बचाई जान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। एक व्यक्ति के इस तरह जिंदगी खत्म करने के प्रयास का असर केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार मानसिक और सामाजिक संकट में घिर जाता है। हालांकि, बदलती पुलिसिंग और सोशल मीडिया कंपनियों के अलर्ट सिस्टम ने ऐसे लोगों तक समय रहते पहुंचने का एक नया रास्ता खोल दिया है। 

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जिले में पिछले नौ माह में पुलिस करीब 20 लोगों को आत्महत्या का प्रयास करने से पहले या प्रयास के दौरान बचा चुकी है। इनमें सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट और वीडियो पुलिस के लिए महत्वपूर्ण अलर्ट साबित हुए हैं। 

पुलिस के अनुसार, आत्महत्या का प्रयास करने वालों में 25 से 35 वर्ष के युवाओं की संख्या अधिक है। आत्महत्या के पीछे पारिवारिक समस्याओं के अलावा बीमारी, नशा, वैवाहिक विवाद, प्रेम संबंधों में असफलता, कारोबार में घाटा, परीक्षा में असफलता, किसी करीबी की मृत्यु और गरीबी जैसे कारण भी सामने आते हैं।

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केस-1
प्रेम संबंध में असफलता पर इंस्टाग्राम पर डाला वीडियो, पुलिस ने बचाई जान

मुंगराबादशाहपुर थाना क्षेत्र में एक युवक ने आत्महत्या से संबंधित वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया। वीडियो की जानकारी मेटा कंपनी की ओर से पुलिस को अलर्ट के रूप में मिली। सूचना मिलते ही मुंगराबादशाहपुर पुलिस सक्रिय हुई और युवक तक पहुंचकर उसकी जान बचाई। काउंसलिंग के दौरान युवक ने पुलिस को बताया था कि प्रेम संबंध में असफल होने के कारण उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाने का विचार किया था।

केस-2
फंदे पर लटकी महिला, खिड़की तोड़कर पुलिस ने बचाया

आत्महत्या की सूचना मिलने के बाद मछलीशहर थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। महिला फांसी के फंदे पर लटक रही थी। पुलिस ने परिजनों की मदद से कमरे की खिड़की तोड़ी और महिला को नीचे उतारकर उसकी जान बचाई। समय रहते पुलिस के पहुंचने से महिला को उपचार के लिए भेजा जा सका। इस मामले में सोशल मीडिया अथवा सूचना के माध्यम से मिले अलर्ट पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई अहम साबित हुई।
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केस-3
इंस्टाग्राम पोस्ट से मिला अलर्ट, 10 मिनट में घर पहुंची पुलिस

22 वर्षीय युवक ने इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से जुड़ी चिंताजनक पोस्ट साझा की। सुबह 7:44 बजे मेटा की ओर से यह अलर्ट यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर को मिला। टीम ने तत्काल युवक की लोकेशन ट्रेस कर रामपुर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए करीब 10 मिनट में युवक के घर पहुंचकर उसे सुरक्षित बचाया। परिजनों की मदद से युवक को संभाला गया और प्राथमिक उपचार कराया गया।

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नकारात्मकता को पहचानना जरूरी
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक एवं बीएचयू के मनोविज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रो. आरएन सिंह के अनुसार आत्महत्या की प्रवृत्ति को समय रहते पहचाना जाए तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ लोगों में कठिन परिस्थितियों से जूझने की क्षमता कम हो जाती है, जबकि नकारात्मक घटनाएं भी उनके व्यवहार को प्रभावित करती हैं। ऐसे लोगों की पहचान जरूरी है जो लगातार चिंता, तनाव या अवसाद से जूझ रहे हों। धैर्य और विवेक के साथ नकारात्मकता से बाहर निकलकर जीवन को फिर से पटरी पर लाया जा सकता है।

इस साल अब तक करीब 20 लोगों की जान पुलिस बचा चुकी है। इनमें मिशन शक्ति, डायल-112 और सोशल मीडिया अलर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पुलिसिंग के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। पहले पुलिस रिएक्टिव थी, यानी घटना होने के बाद मौके पर पहुंचती थी। अब पुलिस प्रो-एक्टिव होकर घटना से पहले ही संभावित खतरे की सूचना पर पहुंचकर लोगों की जान बचाने का प्रयास कर रही है। -आतिश कुमार, एएसपी ग्रामीण

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