चंदवक। राष्ट्रीय राजमार्ग-233 के निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे का विवाद सड़क निर्माण की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहा है। केराकत तहसील क्षेत्र के बलुआ, रामगढ़ बरैछा और परसौड़ी गांव में भूमि विवाद के कारण एनएचएआई का निर्माण बंद है। लंबे समय से मुआवजे का इंतजार कर रहे बलुआ गांव के किसानों का कहना है कि राजस्व विभाग की ओर से अब तक पांच बार पैमाइश कराई जा चुकी है, लेकिन न तो विवाद का समाधान हो सका और न ही प्रभावित किसानों को मुआवजा मिला है। इतना ही नहीं किसानों ने मुआवजा नहीं मिलने के कारण बलुआ, रामगढ़ बरैछा और परसौड़ी गांव में निर्धारित भूमि पर एनएचएआई के अधिकरियों को निर्माण कार्य करने से सीधे मना कर दिया है।
बलुआ गांव में भूमि अधिग्रहण विवाद से लगभग 80 किसान प्रभावित हैं। किसानों का आरोप है कि इनमें से केवल सात किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। जबकि प्रशासन का कहना है कि एनएचएआई की ओर से निर्धारित दर से ज्यादा मुआवजा मांगने के कारण शेष किसानों को भुगतान रुका है। न कि उनकी भूमि विवादित है। कुछ किसानों का मुआवजा उनके ही परिवार के लोगों के की ओर से लगाई गई आपत्ति पत्र के कारण अटका है। बलुआ के किसानों का कहना है कि संबंधित जमीन सालोें से उनके कब्जे में है। साल 2017 से उन्हें भूमि अधिग्रहण से संबंधित नोटिस भी मिलते रहे हैं। एनएचएआई की ओर से जिला न्यायालय और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर मुकदमे में भी उन्हें वादी बनाया गया था। अब मुआवजा देने के समय विभाग उनसे इस तरह का दोहरा खेल खेल रहा है। बलुआ के साथ ही परसौड़ी गांव में भी भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े विवाद के कारण एनएच-233 का काम प्रभावित है। परसौड़ी गांव के किसानों का कहना है कि जब तक भूमि का विवाद और मुआवजे का मामला स्पष्ट नहीं होगा, तब तक निर्माण कार्य नही होने देंगे।
तय सीमा में काम पूरा न होने की आशंका
एनएच-233 पर पिलर नंबर 263 से 279 के बीच 16 किमी के सड़क निर्माण कार्य पूर्ण करने की कुल तय सीमा 24 महीनों की है। इसमें से लगभग 8 महीने पूर्ण हो चुके हैं। बारिश से आई बाढ़ के कारण पुल निर्माण कार्य भी रुक गया है। पूरे काम का 35 प्रतिशत भी कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो सका है। पहले ही कई स्थानों पर विभिन्न कारणों से प्रभावित है। ऐसे में बलुआ और परसौड़ी में भूमि विवाद के कारण काम का अटकना परियोजना की समय सीमा पर अतिरिक्त असर डाल सकता है। यदि जल्द किसानों की जमीनों के लिए उचित समाधान निकाल कर मुआवजे का निस्तारण नहीं किया गया तो निर्माण में और देरी होने की आशंका है।
बलुआ गांव में 80 से ज्यादा लोगों का अटका है मुआवजा
परसौड़ी गांव में बाबुलाल, बतासी देवी, वकील, देवराज यादव, रामआसरे यादव, गुलाब यादव, सुभाष यादव, मुन्ना यादव, लक्ष्मीना देवी समेत 20 से 25 लोगों के मुआवजे का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। बरैछा गांव में मोहम्मद चुनव्वर, गुलबहार, जिबरईल शाह मुम्मद, नजर मोहम्मद, अली हसन, यूनुस समेत 10 से अधिक लोगों का अभी तक अवार्ड ही घोषित नहीं हुआ है। किसानों ने प्रशासन से अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कर निष्पक्ष समाधान कराने और पात्र किसानों को मुआवजा जल्द से जल्द दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों ने यह भी साफ किया है कि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे उच्चाधिकारियों से शिकायत करने के साथ आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
बोले किसान
मुआवजे के लिए सभी कागजी कार्रवाई पूर्ण कर तहसील से राजस्व विभाग की ओर एनएचएआई विभाग को भेज दिया गया है। जिले में स्थित एनएचएआई ऑफिस में जाने पर वहां पैसे की मांग की जाती है। उसके बाद ही मुआवजे की राशि भेजने काे आगे प्रेषित किया जाएगा।
- फूलचंद यादव, परसौड़ी
दस्तावेज की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, अवार्ड घोषित हो चुका है। केवल पैसा भुगतान करना बाकी है। जब तक भुगतान नहीं होगा, जमीन का अधिग्रहण नहीं करने देंगे।
- वंशराज यादव, परसौड़ी
मदीना ने कहा कि उनका और उनके पड़ोसियों के मकान और जमीन दोनों सड़क निर्माण में अधिग्रहित होना है। यदि समय से मुआवजा नहीं मिलेगा तो अधिग्रहण होने के बाद ही काम शुरू होगा। हमारा घर टूट जाएगा, तो हम लोग कहां जाएंगे। समय से मिल जाएगा तो हम कहीं दो कमरे का मकान बना लेंगे।
- मो. मुन्नवर, बरैछा
मुआवजे की समस्या का निस्तारण जल्द से जल्द करने का प्रयास किया जा रहा है। आठ किमी की जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। वहां काम तेजी से चल रहा है। मुआवजे की समस्या से यदि देरी होगी तो बिल्कुल अतिरिक्त समय लिया जाएगा।
- पीयूष अग्रवाल, परियोजना निदेशक
बलुआ गांव में एनएचएआई की ओर से तय मुआवजे की दर से ज्यादा मुआवजा की मांग करने के कारण मामला लंबित है। इस मामले में किसानों से बात कर मामले को जल्द से जल्द निस्तारित करने की कोशिश की जा रही है। - अखिलेश कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी केराकत