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मांगलिक कार्य के लिए करना पड़ेगा इंतजार

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मछलीशहर। शास्त्रों में देव उठनी एकादशी के दिन से चार मास से योग निद्रा में रहे भगवान श्री हरि विष्णु जाग जाते हैं। इस दिन शालिग्राम और तुलसी विवाह उपरांत मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। लेकिन इस वर्ष शुक्रास्त के कारण मांगलिक कार्य के मुहूर्त के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। 29 सितंबर से शुक्र अस्त चल रहे हैं जो 20 या 21 नवंबर को उदय होंगे। इसके बाद शहनाई बजेगी। विद्वानों का कहना है कि शुक्रास्त होने पर मांगलिक एवं शुभ कार्यों को नहीं किया जाता है। इसमें किए गए कार्यों के शुभ एवं अच्छे परिणाम नहीं मिलते। विवाह के अलावा ऐसे कई कार्य जैसे गृह प्रवेश (नए मकान में जाना), बागवानी, ट्यूबवेल लगवाना, टैंक और पंप बनवाना, उपवास को समाप्त करना या शुरू करना, यज्ञ हवन का आरंभ करना, जनेऊ संस्कार, पढ़ाई की शुरुआत करना, प्रथम बार विदेश गमन करना, सरकारी और प्राइवेट नौकरी को नौकरी को पहली ज्वाइनिंग करना, यदि संभव हो तो ऐसे संयोग से बचने का प्रयास करना चाहिए। ज्योतिष व वास्तु के आचार्य डॉ.टीपी त्रिपाठी ने बताया कि विवाह मुहूर्त में मास, नक्षत्र, तिथि, दिन, लग्न व लग्न शुद्धि तो विशेष है ही पर इन सब में इस बात का विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है कि शुक्र उदय हो। इस समय शुक्र अस्त चल रहे हैं। 20 या 21 नवंबर को शुक्र उदय होंगे इसके उपरांत ही विवाह मुहूर्त मिलेंगे। कर्मकांड के विद्वान पंडित मुरारी श्याम पांडेय व्यास के अनुसार नवंबर में 25 तारीख व दिसंबर में दो, सात, आठ, 13, 15 को लग्न का मुहूर्त है जबकि 16 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में चले जाएंगे और खरमास प्रारंभ हो जाएगा तो विवाह मुहूर्त के लिए फिर इंतजार करना पड़ेगा। विवाह मुहूर्त कम मिलने पर हलवाई, बैंड-बाजा, आतिशबाजी, टेंट हाउस संचालक, सजावट और अन्य कारोबार से जुड़े लोगों के धंधे पर प्रभाव पड़ेगा।
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