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UP: 'जो बीजेपी का समर्थन करे, वही हिंदू...', शंकराचार्य का सियासी तंज, जौनपुर में गोमती नदी को किया नमन

Sat, 07 Mar 2026 08:39 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।

सार

UP Politics: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शनिवार को जौनपुर पहुंचे। यहां उन्होंने मीडिया से बात करते हुए भाजपा पर सियासी तंज किया। उन्होंने कहा कि धर्म युद्ध के एलान से उत्तर प्रदेश सरकार के लोग डरे हुए हैं। मेरी यह यात्रा रुकने वाली नहीं है।
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Jaunpur News: हिंदू धर्म और राजनीति के संबंधों को लेकर शनिवार को जौनपुर में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना हिंदू होने की पहचान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज के समय में देश में ऐसी प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, जहां किसी विशेष दल का समर्थन करने वाले को ही सच्चा हिंदू बताया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है।

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा की शुरुआत कर दी है। वह वाराणसी से चलकर शनिवार को जौनपुर पहुंचे। जनपद की सीमा में उनका जोरदार स्वागत हुआ। नईगंज स्थित एक कॉम्प्लेक्स में मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सभी को जानकारी होनी चाहिए गाय विश्व और सभी धर्मों की माता है।
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हम इस यात्रा के माध्यम से चाहते हैं कि धर्म युद्ध आरंभ किया जाए। धर्म युद्ध का मतलब यह है कि एक लाइन खींच जाएगी, जिससे जो असली होगा वह असली के साथ खड़ा होगा और नकली लोग नकली के साथ साथ होंगे। इससे स्पष्ट हो जाएगा की कौन असली है। इससे सनातन धर्म फिर से असलियत में आ जाएगी। कहा कि धर्म को राजनीति से जोड़कर देखने की प्रवृत्ति समाज के लिए ठीक नहीं है। उनका कहना था कि “क्या जो व्यक्ति भाजपा का समर्थन करेगा, वही हिंदू कहलाएगा? हिंदू होने की कसौटी किसी राजनीतिक दल से तय नहीं हो सकती।

भाजपा पर तंज

उन्होंने कहा कि आजकल देश में कोई भी व्यक्ति किसी भी रूप में सामने आ जाता है। कोई अचानक नेता बन जाता है तो कोई संत या संन्यासी बन जाता है। लेकिन केवल वेशभूषा बदल लेने से व्यक्ति का आचरण नहीं बदलता। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति संत का वेश धारण करता है तो उसे उसी के अनुरूप आचरण भी करना चाहिए। समाज में आदर्श प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों की होती है।

शंकराचार्य ने कहा कि भारत की तरक्की तभी संभव है जब लोग अपने धर्म और कर्तव्यों के प्रति ईमानदार रहें। उन्होंने कहा कि धार्मिक मूल्यों को केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना और नैतिकता की राह दिखाना है, न कि समाज में विभाजन पैदा करना।
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गौ संरक्षण को लेकर रखी अपनी बात

इस दौरान उन्होंने गौ संरक्षण के मुद्दे पर भी राज्य सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में गौ माता की रक्षा के प्रति गंभीर है तो उसे जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल घोषणाएं और भाषण देने से गौ माता की रक्षा नहीं हो सकती।

शंकराचार्य ने कहा कि देश के कई हिस्सों में आज भी गौवंश की स्थिति चिंताजनक है। सड़कों पर घूमती और उपेक्षा झेलती गाएं इस बात का प्रमाण हैं कि गौ संरक्षण को लेकर अभी बहुत काम किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में ठोस और प्रभावी नीतियां बनानी चाहिए।

गौरतलब है कि शंकराचार्य काशी से 'धर्म युद्ध' का आह्वान करते हुए लखनऊ की यात्रा पर निकले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य धर्म और समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर जागरूकता फैलाना बताया जा रहा है। उनके बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है और इसे सत्ता और धर्म के संबंधों पर एक नई बहस के रूप में देखा जा रहा है।

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