निरंकारी संत बाबा हरदेव सिंह ने लोगों को निरंकार ब्रह्म की सत्ता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जो मालिक के करीब है वह गरीब नहीं हो सकता। कबीर के अनुसार वास्तव में गुरबत में वही है जो राम नाम रूपी दौलत से वंचित है। वह बुधवार को पूर्वांचल विश्वविद्यालय के मैदान में आयोजित विशाल संत समागम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि संतों और भक्तों का दर्जा ऊंचा रहता है। क्योंकि वह ऊंचे के साथ नाता जोड़ते हैं और भक्ति ही वो ऊंचाई प्रदान करती है। कहा कि मीरा, कबीर आदि भक्तों का ऊंचा रुतबा उनके पास राम नाम धन रहने के नाते ही है। भक्ति या बंदगी झोपड़ी को महल से भी भव्य और सुंदर बना देती है। भक्ति हर हाल में आन प्रदान करती है। चाहे भक्त धूप में हो या बरसात में वह स्वयं आनंदित रहकर लोगों में आनंद बांटता है।
क्योंकि वह आनंद के स्रोत निराकार रूप में परमात्मा से जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में ठहराव यानि आवागमन की मुक्ति के लिए ब्रह्मज्ञान को प्राप्त करना आवश्यक है। शरीरों की यात्रा तो वर्षों के बाद खत्म हो जाती है। लेकिन आत्मा की यात्रा बिना सत्य के बोध के खत्म नहीं होती।
उन्होंने कहा कि प्यार का माहौल बनाने के लिए धरती को गुलजार करें। जातपात की भावना से ऊपर उठकर संसार में फैली नफरत को मिटाएं। कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विशाल, छोटेलाल, बहन केशरी, अंजू चौहान, कमला शंकर, प्रेमचंद्र, निशा, बहन खुशबू, रामअक्षैवर, रामअवंत, वंशलाल, अजय कुमार, रामबचन, सुभाष चंद्र विश्वनाथ, आदि ने गीत के माध्यम से निरंकारी बाबा का गुणगान किया।