गर्मी के तीखे मिजाज से 1773 गांवों में लगे तकरीबन 5000 हैंडपंप दम तोड़ चुके हैं। वैसे तो एक लाख हैंडपंप शुद्ध पेयजल के नाम पर लगाए गए हैं, लेकिन कहीं खराब हैं तो कहीं प्रदूषित पानी आ रहा है। सैकड़ों गांवों के 3000 लोग हैंडपंप रिबोर होने की बाट जोह रहे हैं।
लेकिन विभाग अभी रिबोर नहीं कर रहा है। सबसे अधिक समस्या डार्क जोन वाले खंड विकास क्षेत्रों में है। मौसम के तीखे मिजाज से गांव में भी लोग परेशान हैं। उन्हें शुद्ध पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। जिस गांव में 15 से 20 इंडिया मार्का टू हैंडपंप हैं वहां तीन से चार खराब हैं।
तकरीबन आठ हैंडपंपों के पानी में खारापन है। कारण टोटल डिजाल्व सालिड (टीडीएस) 1000 से 1500 तक हो गया है। टीडीएस बढ़ने से लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
हैंडपंपों की छोटी-छोटी खराबियां दूर करने के लिए ग्राम पंचायतों को भी पैसा भेजा गया है, लेकिन कोई खराबी दूर नहीं की जा रही है। उधर जिले में कोई भी हैंडपंप रिबोर नहीं हो रहे हैं।
जबकि पांच हजार से अधिक हैंडपंप रिबोर की बाट जोह रहे हैं। शासन ने एक फरमान जारी किया है। जिसमें विधायकों के प्रस्ताव पर ही हैंडपंप लगाए जाएंगे और रिबोर किए जाएंगे। इस फरमान से पहले तीन हजार लोगों ने हैंडपंप रिबोर की गुहार लगाई है।
लेकिन विभाग इसे रिबोर कराने में लाचार है। जिले के दो एमएलसी सहित 11 विधायकों में से किसी ने प्रस्ताव ही नहीं दिया है। जबकि हर विधायक 100 हैंडपंप का प्रस्ताव दे सकता है जिसमें रिबोर भी शामिल है।