जमैथा गांव में खेत में खरबूजे का फल दिखाती महिला।
दिल्ली सहित अन्य दूसरे प्रदेशों में जनपद का खरबूज मिठास बिखेरता है। जनपद से इसको बाहर भेजा जाता है। किसानों का भी खरबूज व तरबूज की खेती से रोटी रोजी अच्छे ढंग से चलता है। कम लागत में अधिक कमाई होने के कारण जनपद में किसान बड़ी तादात में इसकी खेती करते हैं।
साथ ही धान व गेहूं के घाटे की भरपाई भी किसान कर लेते हैं। हालांकि इसकी खेती करने के लिए किसानों को कोई सरकारी लाभ नहीं मिलता है। किसान स्वयं खरबूज व तरबूज की खेती करते हैं। बता दें कि जिले के लगभग सभी ब्लाकों में खरबूज व तरबूज की खेती की जाती है।
विशेष रुप से शाहगंज, धर्मापुर, बदलापुर, बक्शा व खुटहन ब्लाक में खरबूज व तरबूज की खेती ज्यादा की जाती है। धर्मापुर ब्लाक के जमैथा न्यायपंचायत में बड़ी तादात में खेती होती है। 14 पुरवे के इस न्याय पंचायत में कोई ऐसा किसान नहीं है जो इसकी खेती न करता हो।
किसान खरबूज व तरबूज की बुआई मार्च के पहले सप्ताह में कर देते हैं, जो मई के पहले सप्ताह में तैयार हो जाता है। वर्तमान समय में जिले में 130 हेक्टेयर भूमि पर खेती की गई है। इसकी खेती करने में लागत भी अन्य फसलों की अपेक्षा काफी कम लगती है।
डेढ़ बीघा भूमि पर खेती करने में लगभग ढ़ाई हजार रुपए की लागत आती है। जबकि किसानों को 20 से 25 हजार रुपए की आय हो जाती है। ऐसे में किसानों को खरबूज व तरबूज की खेती से अच्छी इनकम हो जाती है। जिससे किसान खरबूज व तरबूज की खेती करने में कोताही नहीं बरतते हैं।