फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विसर्जन कुंड में भरा पानी, परंपरा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन बना चुनौती

विज्ञापन
प्रतिमा विसर्जन घाट तक पहुंचा गोमती का पानी। - फोटो : JAUNPUR
विज्ञापन
जौनपुर। नवरात्र में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर दुर्गा महासमिति एवं प्रशासन के बीच टकराव के आसार पैदा हो गए हैं। जहां प्रशासन आस - पास के तालाबों को चिन्हित करने में जुटा है वहीं श्री दुर्गा पूजा महासमितियां अपनी परंपरा से नहीं हटना चाह रहीं हैं। उधर गोमती नदी में विसर्जन के मुद्दे पर स्वच्छ गोमती अभियान के कार्यकर्त्ताओं का कहना है कि नदी में प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ तो ठीक नहीं होगा।
विज्ञापन

गोमती नदी का पानी चारों तरफ फैल गया है। विसर्जन कुंड में पानी भर गया है। शहर की 120 वहां मूर्तियों को ले जाना संभव नहीं है। विसर्जन कुंड पर जाने का जो रास्ता है वह नदी के पानी से डूब गया है। नदी और विसर्जन कुंड पानी भरने से एक हो गया है। विसर्जन कुंड में मूर्तियों का विर्सजन किया गया तो प्रदूषण नदी में फैलेगा जिससे नदी की गंदगी बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी हालत में नदियों में मूर्तियों का विसर्जन नहीं किया जाए। उधर स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने डीएम को पत्र लिखा है।
उन्होंने कहा है कि विसर्जन कुंड एवं नदी पानी भरने से एक हो गया है। ऐसे में मूर्तियों का विसर्जन होने से नदी में केमिकल फैल सकता है। उन्होंने कोर्ट एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों का हवाला भी दिया है। प्रश्न यह है कि ऐसे में दुर्गा प्रतिमाओं का विर्सजन कहा और कैसें होगा। इसे लेकर प्रशासन चितिंत हो गया है। विसर्जन कुंड में पानी भरने की वजह से गुरूवार को नगरपालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट एवं पुलिस क्षेत्राधिकारी सिटी ने दो तालाबों की खोज किया है। एक तालाब आजमगढ़ मार्ग पर तो दूसरा शीतला चौकियां धाम के पास है। यहां म़ूर्तियां विसर्जित करने को लोग राजी नहीं है।
विज्ञापन

श्री दुर्गा पूजा महासमिति के अध्यक्ष विजय सिंह बागी का कहना है कि विसर्जन कुंड में ही दुर्गा प्रतिमाएं विसर्जित की जाएगी। हमारी जो परंपरा है उस पर हम कायम है। प्रशासन इसकी व्यवस्था करें। हम कहीं और मूर्तियों का विसर्जन नहीं करेंगे।
वहीं नगर पालिका परिषद के अधिशासी अभियंता आरके प्रसाद का कहना है कि विसर्जन कुंड में पानी भर गया है। ऐसे में मूर्तियों का विसर्जन नहीं हो सकता। कुंड में प्लास्टिक का लेयर खाली कर डालना होता है ताकि केमिकल नदी में नहीं फैलें। नदी और विसर्जन कुंड एक हो गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दो तालाबों को चयनित किया गया है। जहां विसर्जन कराया जाएगा।

गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद डूबा प्रतिमा विसर्जन घाट।- फोटो : JAUNPUR

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें