ऐसे ही एक बंदी आनंद को पीटकर मरणासन्न कर दिया गया है। बंदी का कहना है कि जेल के अस्पताल से कोई दवा-उपचार नहीं होता। तबीयत बिगड़ती रहती है, लेकिन जिम्मेदार बस टालते रहते हैं। बाद में बंदी की मौत होने पर उसे रेफर कर यह कहा जाता है कि रास्ते में मौत हुई। बागेश मिश्रा की मौत भी ऐसे ही हुई है। जेल निरीक्षण में आने वाले अफसरों से शिकायत करते हैं तो वह भी बस सुनकर चले जाते हैं। कोई कुछ नहीं करता। इसलिए मजबूरन बंदी-कैदी आक्रोशित हो गए हैं, ताकि उनकी बात को सुनने के लिए आला अधिकारी यहां आएं। बता दें कि बीते गुरुवार को आजीवन कारावास की सजा काट रहे बागेश मिश्रा की मौत के बाद जौनपुर जिला जेल धधक उठा था।
इस पूरे मामले में जौनपुर जिला जेल के अधीक्षक एसके पांडेय ने कहा कि जेल मैनुअल के अंतर्गत ही बंदियों को सुविधाएं दी जाती हैं। जिन बंदियों की मनमानी नहीं चल पाती, वही झूठे आरोप लगाते हैं। वायरल वीडियो के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जांच कर ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है।
जौनपुर जिला जेल के अंदर सिगरेट-तंबाकू सहित हर सामान उपलब्ध है। बस मुंहमांगा दाम देने की जरूरत है। यहां 10 रुपये में तंबाकू बेचा जाता है। अगर सिगरेट चाहिए तो 20 रुपये देने होंगे। एक माचिस का दाम भी पांच से दस रुपये तक है। मुलाकात के दौरान परिवार वाले खाने-पीने का कोई सामान लाते हैं तो उसे तब तक अंदर नहीं जाने दिया जाता, जब तक 'सुविधा शुल्क" नहीं मिलता। नए बंदियों के लिए यह रेट 100 से 500 रुपये तक है। वर्षों से बंद पुराने प्रभावशाली बंदियों को इसमें राहत मिल जाती है।
जौनपुर जिला जेल में बैरक नंबर 14 ऐसी जगह है, जो अन्य बैरकों से एकदम अलग है। यहां फर्श और दीवारों पर टाइल्स है। बैरक में कूलर लगा हुआ है। बैरक से ही लगा शौचालय भी है। अगर कोई बंदी इस बैरक में जाना चाहता है तो उसे 10 से 15 हजार रुपये तक देने होते हैं। अगर पैसा देने में सक्षम नहीं तो वह इसकी ओर देख भी नहीं सकता। बैरक बदलने के लिए भी रेट फिक्स है।