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इसरो की स्थापना में विक्रम साराभाई की भूमिका अहम

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इजौनपुर। जिले के सरावां गांव स्थित शहीद लाल बहादुर गुप्त स्मारक पर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी और लक्ष्मी बाई ब्रिगेड की ओर से भारत को अंतरिक्ष तक पहुंचाने वाले वैज्ञानिक विक्रम अंबालाल साराभाई की 101 वीं जयंती पर उन्हें नमन किया गया। शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया गया। लक्ष्मी बाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि अहमदाबाद के एक अग्रणी कपड़ा व्यापारी के घर 12 अगस्त 1919 को को जन्मे साराभाई की गिनती भारत के महान वैज्ञानिकों में की जाती है।
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वह अपने साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों, विशेषकर युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने में काफी मदद करते थे। साराभाई का अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में काफी योगदान रहा। उन्होंने 1947 में अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) की स्थापना की और थोड़ी ही समय में इसे विश्वस्तरीय संस्थान बना दिया। वैज्ञानिकों ने जब अंतरिक्ष अध्ययन के लिए सैटलाइट्स को एक अहम साधन के रूप में देखा, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और होमी भाभा ने विक्रम साराभाई को अध्यक्ष बनाकर इंडियन नेशनल कमिटी फॉर स्पेस रिसर्च की स्थापना के लिए समर्थन दिया।
15 अगस्त 1969 को इंडियन स्पेस रीसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) की स्थापना की। 1942 में मशहूर नृत्यांगना मृणालिनी से इनका विवाह हुआ। बेटी मल्लिका अभिनेत्री और बेटे कार्तिकेय शोध और अनुसंधान क्षेत्र से जुड़े हैं। विक्रम साराभाई का महज 52 साल की उम्र में 30 दिसंबर 1971 को तिरुवनंतपुरम में निधन हो गया। इस मौके पर डॉ. धरम सिंह , मैनेजर पांडेय , अनिरुद्ध सिंह , दिशा , मंजीत कौर मौजूद रही।
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