विजय ने 2012 में हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। उसके बाद जौनपुर से इंटर और यहीं के मो. हसन पीजी कॉलेज से बीकॉम किया है। उस समय विजय के पिता श्याम की देवगांव आजमगढ़ में मिठाई की दुकान थी। दुकान पर विजय भी कभी कभार जाता था। वहीं पर किसी किशोरी से संपर्क हो गया और दोनों भाग गए।
किशोरी के परिजनों की तहरीर पर देवगांव थाने में ही पॉक्सो एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ, करीब तीन माह के बाद मुंबई से पुलिस ने दोनों को बरामद किया। उसके बाद उसे हवालात में रखा गया। विजय की मां निर्मला ने बताया उस मामले में करीब छह माह बाद वह घर आया था। अब सुलह हो चुकी है।
सीओ केराकत गौरव शर्मा ने कहा कि अभी तक विजय यादव के खिलाफ दो मुकदमे सामने आए हैं। पहला, आजमगढ़ के देवगांव में पॉक्सो एक्ट और दूसरा, 2020 में महामारी एक्ट के तहत केराकत में दर्ज किया गया था। फिलहाल कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। लखनऊ की टीम पूछताछ कर रही है। वहां से यदि कोई इनपुट मिलता है तो उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।