झूला वनस्पति की फैक्ट्री केराकत तहसील के नाऊपुर स्थित जेवीएल एग्रो पर एफएसएसएआई की कार्रवाई की गाज गिर सकती है। आरोप है कि फैक्ट्री बंद होने का शपथ-पत्र देने के बाद भी संचालित की जा रही थी। इस मामले को केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकारी उत्तरी क्षेत्र के सीईओ बीएस आचार्य ने गंभीरता से लिया है।
संभावना है कि इस मामले में फैक्ट्री का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। 11 करोड़ की लागत वाली जेवीएल का उत्पाद झूला वनस्पति का सैंपल गत वर्ष जांच में फेल हो गया था। इसे मानव जीवन के लिए सुरक्षित न होने की रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकारी डा. मनीषा नारायण ने दो जुलाई, 2015 को फैक्ट्री का खाद्य लाइसेंस
निलंबित कर दिया था। फैक्ट्री प्रबंधन ने इसके खिलाफ नई दिल्ली स्थित भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण में मुकदमा दायर किया। इस मामले में सीईओ ने फैक्ट्री सील की कार्रवाई करने वाले ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट एवं अभिहित अधिकारी को 11 नवंबर को तलब किया था। सूत्रों की मानें तो सुनवाई में फैक्ट्री के
प्रोडक्शन मैनेजर शिवशंकर यादव ने सीईओ बीएस आचार्य के समक्ष इस आशय का शपथ पत्र दिया कि कंपनी के निदेशक ने उत्पादन नहीं करने के संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने सुनवाई के दौरान फैक्ट्री संचालित होने का वीडियो फुटेज प्रस्तुत किया। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि फैक्ट्री प्रबंधन ने भारतीय खाद्य
संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नियमों की अवहेलना की है। कारण तीन अक्टूबर 2016 को एफएसएसएआई ने फैक्ट्री का उत्पादन बंद करने का आदेश जारी किया था। चर्चा है कि सुनवाई के दौरान जिला अभिहित अधिकारी और फैक्ट्री प्रबंधन के अधिवक्ताओं के बीच बहस हो गई। सुनवाई पर निर्णय चीफ एक्जीक्यूटिव अफसर द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है। संभावना है कि फैक्ट्री पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।