करंजाकला। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय की प्रायोगिक परीक्षा में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। विश्वविद्यालय सॉफ्टवेयर के सहारे शिक्षकों का डाटा, विषयों की संख्या, कॉलेज के नाम तय करने पर काम कर रहा है। साथ ही प्रायोगिक परीक्षा में पारदर्शिता के लिए विश्वविद्यालय में काम कर रही एजेंसी के द्वारा बनाए गए सॉफ्टवेयर से ही परीक्षकों के नाम तय होंगे।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध जौनपुर व गाजीपुर में राजकीय, स्ववित्तपोषित व वित्तपोषित के कुल 573 कॉलेज संचालित है। कॉलेजों में कुछ विषयों में प्रायोगिक परीक्षा भी कराई जाती है। इसको लेकर पिछले कुछ सालों से तमाम शिकायतें मिल रही थी कि परीक्षकों पर कई महाविद्यालय दबाव बनाकर छात्रों की संख्या पूरी न होने के बाद भी नंबर चढ़ाने व हस्ताक्षर करने की बात कहते है। वहीं कई परीक्षकों को समस्या थी कि विश्वविद्यालय अपने चहेते को प्रायोगिक परीक्षा के लिए ज्यादा कॉलेज आवंटित कर देता है। इस समस्या को देखते हुए विश्वविद्यालय ने बड़ा बदलाव किया अब प्रायोगिक परीक्षा के लिए नामित परीक्षकों की सूची विश्वविद्यालय की तरफ से बनाए गए सॉफ्टवेयर से सीधा उनके ईमेल और विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। जौनपुर में दो राजकीय महाविद्यालय, 14 वित्तपोषित महाविद्यालय, 203 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय संचालित हैं। वहीं गाजीपुर में तीन राजकीय, आठ वित्तपोषित, 343 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय संचालित है।
पहले की समस्या को देखते हुए परीक्षकों की सूची विश्वविद्यालय में काम कर रही एजेंसी के द्वारा बनाए गए सॉफ्टवेयर से भेजी जाएगी। इसकी सूचना परीक्षकों को ईमेल और विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। एक रैंडम लिस्ट जारी की जाएगी जिसमें महाविद्यालय के नाम, छात्रों की संख्या व परीक्षकों का नाम होगा। -अजीत सिंह, सहायक कुलसचिव परीक्षा, पूविवि