जौनपुर। मुश्किलें तो हर सफर का हुस्न है, फिर कैसे कोई राह चलना छोड़ दे... जिंदगी के इसी फलसफे के साथ जौनपुर के कई परिवारों ने लॉक डाउन के साथ जीने की राह ढूंढ ली है। कोरोना के कहर ने उनका रोजगार छिना तो हार मानकर घर बैठने की बजाए उन्होंने नई शुरुआत की। जो पहले चाट-पकौड़ी बेचते थे, वह अब फल-सब्जी बेच रहे हैं। दुकानों पर काम करने वाले और कई छोटे दुकानदारों ने भी रोजगार बदल लिया है।
शहर के परमानतपुर निवासी प्रमोद गुप्ता पहले ओलंदगंज में चाट बेचते थे। रोजाना शाम को उनका ठेला लगता था। इस रोजगार से वह अच्छी कमाई कर लेते थे। लॉक डाउन हुआ तो उनके रोजगार पर भी ताला लग गया। शुरुआत में कुछ दिनों तक तो वह घर बैठे रहे, मगर जब लॉक डाउन के लंबा चलने के आसार दिखे तो रोजगार बदल दिया। अब वह सब्जी लेकर मोहल्लों में घूम रहे हैं। घर-घर जाकर इसकी बिक्री कर रही हैं। जरुरी सेवाओं में होने के कारण उन्हें छूट भी मिल रही है। इसी मोहल्ले के मनोज मद्धेशिया, नखड़ू भी पहले ठेले पर चाट लगाते थे। उन्होंने भी अब सब्जी बेचना शुरू कर दिया है। इसके जरिए वह पहले जैसी आमदनी तो नहीं कर रहे, लेकिन जीविकोपार्जन के लिए पैसा मिल जा रहा है। कालीकुत्ती निवासी प्रमोद निषाद भी पेंटिंग छोड़कर फल-सब्जी बेच रहे हैं। पवन साहू की जनरल स्टोर की दुकान है। लॉक डाउन के कारण दुकान बंद है तो वह अखबार बेचकर आमदनी कर रहे हैं। ख्वाजगी टोला निवासी महताज भी माल ढुलाई का काम बंद होने पर सब्जी बिक्री में जुटे हैं।