घर वाले पढ़ाई के लिए बनाते थे दबाव, इसलिए भागीं
तीनों किशोरियां आठवीं कक्षा की छात्रा हैं। उनकी उम्र करीब 15 वर्ष है। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वह स्वेच्छा से घर से निकली थीं। उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था। वह हीरोइन बनना चाहती हैं। अपने सपने साकार करने के लिए मुंबई जा रही थी। उनके पास मात्र ढाई हजार रुपये थे। उनका कहना था कि उनके घर वाले बार-बार उन्हें पढ़ाई के लिए कहते थे। उन्हें लगा कि घर रहकर अपने सपने साकार नहीं कर पाएगी। मुंबई आधुनिक शहर है, वहां जाकर वे अपने सपने पूरे कर सकती हैं।
बच्चों की निगरानी रखें अभिभावक
एसपी राजकरन नय्यर ने कहा है कि अभिभावक बच्चों को मोबाइल दे रहे हैं तो इस पर भी ध्यान दें कि बच्चा उसका किस तरह प्रयोग कर रहा है। अभिभावक के लिए बहुत जरूरी है कि बच्चों से संपर्क बनाकर रखें। उनसे जाने वह क्या सोच रहे हैं, उनके दिमाग में क्या चल रहा है।
एसपी ने बच्चों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया का प्रयोग करते समय सतर्क रहें, सोशल मीडिया के माध्यम से यदि कोई व्यक्ति उनसे संपर्क कर कहीं बुलाता है तो इसकी सूचना अपने अभिभावक को अवश्य दें । कोई भी अपराधी बच्चों का गलत इस्तेमाल कर सकता है। उन्हें गलत कार्यों में लगा सकता है। बच्चों के मन में क्या चल रहा है उसे अपने अभिभावक से अवश्य बताएं।