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जिले के दो आक्सीजन प्लांट बंद एक शुरू ही नहीं हुआ

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जौनपुर। कोविड काल में मरीजों की जान बचाने के लिए जिले में 14 आक्सीजन प्लांट लगाए गए थे, जो रखरखाव के अभाव में खराब होते जा रहे हैं। दो आक्सीजन प्लांट कई माह से बंद पड़े हैं। जबकि एक प्लांट आज तक चालू ही नहीं हुआ। आक्सीजन प्लांट के रखरखाव की व्यवस्था भी भगवान भरोसे हैं। इसके चलते एक-एक कर प्लांट बंद होते जा रहे हैं। उसकी वजह है कि आक्सीजन प्लांट चलाने के लिए आज तक टेक्नीशियन की तैनाती अधिकांश प्लांटों पर नहीं की जा सकी है।
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ऑक्सीजन प्लांट चलाने के लिए टेक्नीशियन की भर्ती नहीं हुई। इसलिए प्लांट संभालने के लिए वार्ड ब्वाय और स्वीपर को ऑपरेटर का जिम्मा दे दिया गया। इतना ही नहीं, मर्जी मरीजों को भी कितनी मात्रा में आक्सीजन दी जानी है, इसका कोई मानक नहीं है। मनमानी तरीके से आक्सीजन की आपूर्ति दी जाती है। इन वार्ड ब्वाय के पास न डिग्री और न कोई अनुभव है। इसके बाद भी उनकी ड्यूटी लगा दी गई है। शुरू यह तय हुआ कि था कि प्लांट को चलाने के लिए टेक्नीशियन की तैनाती की जाएगी लेकिन आज तक नहीं किया गया। एक वार्ड ब्वाय ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कई बार हमारी ड्यूटी आक्सीजन प्लांट पर लगा दी गई थी। जब की मुझे कोई जानकारी नहीं थी।
इन स्थानों पर लगे हैं आक्सीजन प्लांट
जौनपुर। जिला महिला अस्पताल में दो, जिला अस्पताल में दो, सीएचसी सतहरिया, बदलापुर, बक्शा, मछलीशहर, सुजानगंज, बरसठी, मडि़याहूं, केराकत, शाहगंज, जलालपुर रेहटी में आक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। इसमें से बदलापुर और रेहटी जलालपुर में लगा प्लांट काफी दिनों से बंद पड़े है। जिला अस्पताल में लगा एक प्लांट आज तक चालू नहीं किया गया है। दो सीएचसी पर लगे प्लांट काफी दिनों से बंद पड़े हैं। आक्सीजन प्लांटों की देखभाल का जिम्मा भगवान भरोसे है।
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वर्जन
जो आक्सीजन प्लांट बंद पड़े हैं, उनकी मरम्मत कराने के लिए टेक्नीशियन को बुलाया गया है। जल्द ही दोनों को चालू करा दिया जाएगा। शेष प्लांट चालू हालत में हैं। जिले में आक्सीजन की कमी नहीं है। - डा. राजीव कुमार यादव, एसीएमओ
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