कलेक्ट्रेट तिराहे पर अवैध तरीके से मोहर बनाने की सूचना के बाद एडीएम वित्त के आदेश के बाद मोहर बना?
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जौनपुर। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल ने शनिवार को छापा मारकर फर्जी मुहर व हस्ताक्षर बनाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को पकड़ा। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दोनों का चालान कर न्यायालय भेज दिया गया है।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल ने शनिवार को एक आर्डर पर खुद के कोर्ट की मुहर लगी देखी तो वे हैरान रह गए। इसके बाद उन्होंने मूल पत्रावली निकलवाकर देखी तो पता चला कि उन्होंने उस पर मुहर नहीं लगाई है। इस पर उन्होंने कलेक्ट्रेट गेट के सामने एक गुमटी पर लेखपाल को भेजा। वहां उसने देखा कि एसडीएम कार्यालय की मुहर पड़ी है। एक पत्र पर मोहर लगी भी थी। लेखपाल ने इसकी जानकारी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को दी। इसे संज्ञान में लेते हुए उन्होंने पुलिस के साथ गुमटी की जांच की। इस दौरान 200 से अधिक मुहर मिली। जांच में पता चला कि वह बिना अनुमति के एसडीएम, थाने, कोर्ट , एसपी, डीएम कोर्ट आदि अधिकारियों की मुहर बना देता है। मोहर लगाने के बाद फर्जी हस्ताक्षर करा दिया जाता है। दुकानदार को लाइन बाजार पुलिस के हवाले कर दिया गया। इसके बाद नखास में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने एक दुकानदार के यहां छापा मारा। यहां से भी 20 से अधिक मुहर मिली। जांच में पता चला कि 200 रुपये लेकर कंम्यूटराइज और रबर की मुहर बनाई जाती है। प्रशासन की इस कार्रवाई से फर्जी मुहर बनाने वालों में खलबली मच गई है। कई दुकानदार अपनी-अपनी दुकान बंद कर फरार हो गए। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल ने बताया कि मुहर की गिनती नहीं हुई है, लेकिन वो दो सौ से अधिक होगी। पकड़े गए आरोपी मेरे कोर्ट, डीएम कोर्ट, एसपी और थानों की फर्जी तरीके से मुहर बना देते थे।