जौनपुर। प्रबोधिनी एकादशी का पर्व बृहस्पतिवार को नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में धूमधाम से मनाया गया। महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने व्रत रखा। महिलाओं ने घरों में विधि-विधान से गन्ने का मंडप बनाकर तुलसी और शालीग्राम का विवाह संपन्न कराया। इस दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाए। पर्व को लेकर बाजारों में सुबह से ही खरीदारों की भीड़ रही। बाजार में गन्ना, सिंघाड़ा, कंदा, केला आदि की दुकानें सजी रहीं।
नारद पुराण के अनुसार कार्तिक शुक्ल एकादशी को हरि प्रबोधिनी एकादशी कहते है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन उपवास करके रात में सोए हुए भगवान को गीत आदि मांगलिक उत्सवों के द्वारा जगाने का विधान है। प्रबोधिनी एकादशी के दिन चारों वेदों के विविध मंत्रों व वाद्य यंत्रों के द्वारा भगवान लक्ष्मीपति को जगाना चाहिए।
घरों में महिलाओं ने तुलसी विवाह के लिए पहले गमले को रंगा। इसके बाद गन्ने का मंडप बनाकर तुलसी के पौधे पर चुनरी लपेटा जाता है। तुलसी को अचल सुहाग की प्रतीक चूड़ियां पहनाकर शृंगार किया जाता है। प्रथम गणपति वंदना करके भगवान शलिग्राम का विग्रह मां तुलसी के समीप रखकर 16 प्रकार के पूजन कर विष्णु प्रिया तुलसी भगवान शालिग्राम को अर्पण की जाती है। तुलसी की सात परिक्रमा कर उनकी आरती की जाती है। इसके बाद तुलसी विवाहोत्सव संपन्न होता है। मांगलिक गीत गाए जाते हैं।