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दुआ मांगो कोई ऐसे यतीम न हो

Sat, 27 Dec 2014 11:43 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
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शहर के शिया कालेज के संस्थापक मोहम्मद मोहसिन मरहूम के इसाले सवाब की मजलिस आयोजित हुई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जावेद आब्दी ने मजलिस को खिताब किया।
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 पाकिस्तान के प्रसिद्ध नौहाख्वां शादमान रजा नकवी ने एक दर्जन नौहा पेश किया। कर्बला में इमाम हुसैन की मजलुमी का मंजर प्रस्तुत किया तो लोगों की आंखें नम हो गईं। उनका दर्दनाक नौहा ‘अजादारो दुआ मांगो कोई ऐसे

 यतीम न हो’ सुनकर सभी की आंखों से आंसू निकल पड़े। इससे पहले मजलिस की शुरूआत कमर रजा और आरिज रजा द्वारा सोजख्वानी से की गई।

मौलाना जावेद आब्दी ने कहा कि दुनिया अगर अहलेबैत का मर्तबा समझी जाती तो आपस में एख्तिलाफ न होता। आज के लोग खुदा को अपने-जैसे समझने की भूल कर बैठे हैं। जबकि अल्लाह ने कुरान में और रसूल ने मिंबर में
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 अहलेबैत को मर्तबा बार-बार बयान किया है, लेकिन दुनिया के लोग अपने स्वार्थ को अहमियत दी।  लोग यह भूल गए कि खुदा की अहमियत अधिक है। कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सीराज मेहंदी ने सलाम और

 मर्सिया पेश किया। उन्हाेंने कहा कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन जितने भी सहाबी मैदान की तरफ गए उनके पीछे भी कोई ना कोई गया। औनो मोहम्मद गए तो उनके हौसले बढ़ाने के लिए जनाबे कासिम, हजरत अली अकबर

 और हजरत अब्बास भी गए, लेकिन ऐसा भी वक्त आया कि जब इमाम हुसैन जानिबे मकलत रवाना हुए तो उनके आगे पीछे कोई नही था। जो इमाम का साथ देता पांच वर्ष की इमाम की बेटी सकीना घोड़े के पांव से लिपटी हुई

 फरियाद जरूर कर रही थी कि ऐ घोड़े मेरे बाबा को ना ले जा। क्योंकि सुबह से जो भी गया वह वापस नही लौटा है। इस मौके पर कालेज के मौलाना सफदर हुसैन जैदी, मौलाना हसन मेहदी, मोहम्मद हसन तनबीर, नजमुल हसन नजमी, समसीर हसन आदि मौजूद थे।
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