काशी, प्रयाग और अयोध्या की त्रयी से जुड़ा प्राचीन शहर जौनपुर जल्दी ही पर्यटन के नक्शे पर चमक बिखेरता दिखेगा। इन तीनों तीर्थस्थलों के बीच में पड़ने वाले इस जिले में विदेशी के साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने
खाका तैयार कर लिया है। बाबतपुर सेे वाराणसी जाने वाले विदेशी पर्यटकों को जौनपुर लाने और उन्हें यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया कराने की कवायद शुरू हो गई है। सड़कों के चौड़ीकरण से लगायत स्मारकों और धरोहरों के
विकास और सौंदर्यीकरण के लिए एक अरब 26 करोड़ की योजना बनाई गई है। काशी, प्रयाग और अयोध्या के मध्य स्थित जौनपुर में अतीत काल से ही विभिन्न जाति धर्मों का अद्भुत संगम रहा है। बौद्ध और हिंदूकाल में यहां की संस्कृति
उच्च शिखर पर थी। 13 वीं सदी में शर्की शासन में यहां समृद्धि राजनीतिक शक्ति, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नति चरम पर रही। शाही किला, अटाला मस्जिद, बड़ी मस्जिद, शाही पुल, झझरी मस्जिद, लालदरवाजा, चार अंगुल की मस्जिद,
शाह फिरोज का मकबरा जैसे ऐतिहासिक दर्शनीय निर्माण इसी दौर में हुए, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग बाहर से आते हैं। इसके अलावा जिले के शीतला चौकियां धाम, मैहर मंदिर, त्रिलोचन महादेव का दर्शन करने हर साल लाखों
लोग यहां आते हैं। पर्यटन की इन्हीं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पर्यटन विकास की योजना तैयार की है। 126 करोड़ की योजना में सड़क से बिजली के खंभों को हटाने, भूमिगत पेयजल पाइप लाइन बिछाने, सड़कों को चौड़ा
करने के साथ ऐतिहासिक इमारतों, धार्मिक स्थलों का समुचित विकास कराया जाएगा। 17.47 करोड़ की लागत से चौराहों के चौड़ीकरण का कार्य शुरू भी हो गया है।
गोमती नदी के शाही पुल पर लाइटिंग आदि अन्य कार्यों के लिए चार करोड़ योजना की वित्तीय मंजूरी प्राप्त हो चुकी है, जिस पर एक सप्ताह के भीतर काम शुरू हो जाएगा। इसके अलावा अटाला मस्जिद के सुंदरीकरण के लिए 9 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी है।